मेकेदातु बांध पर केंद्रीय मंत्री के जवाब ने न्यायालय के फैसले की गलत व्याख्या की: पलानीस्वामी

मेकेदातु बांध पर केंद्रीय मंत्री के जवाब ने न्यायालय के फैसले की गलत व्याख्या की: पलानीस्वामी

मेकेदातु बांध पर केंद्रीय मंत्री के जवाब ने न्यायालय के फैसले की गलत व्याख्या की: पलानीस्वामी
Modified Date: July 28, 2026 / 08:11 pm IST
Published Date: July 28, 2026 8:11 pm IST

चेन्नई, 28 जुलाई (भाषा) ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कर्नाटक सरकार द्वारा कावेरी नदी पर मेकेदातु में प्रस्तावित बांध को लेकर संसद में केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी के जवाब की मंगलवार को आलोचना की और कहा कि जवाब में उच्चतम न्यायालय के फैसले की गलत व्याख्या की गई है।

पलानीस्वामी ने केंद्रीय मंत्री के उक्त बयान पर गहरा आश्चर्य जताते हुए कहा कि अंतरराज्यीय नदियां राष्ट्रीय संपत्ति हैं और ऊपरी तटवर्ती राज्य एकतरफा तरीके से जल प्रवाह में बदलाव नहीं कर सकते।

उन्होंने केंद्र सरकार और उसके मंत्रियों से आग्रह किया कि वे लोगों की भावनाओं से जुड़े मुद्दों, खासकर मेकेदातु बांध जैसे विषयों पर अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय जल विवादों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दिए जाने वाले जवाबों में ऐतिहासिक संदर्भ, कानूनी तथ्यों और प्रभावित लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने 2018 के उच्चतम न्यायालय के फैसले के पृष्ठ 342 का हवाला दिया और उनके अनुसार, उसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ‘‘नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित कोई भी राज्य ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जिससे निचले हिस्से में स्थित राज्यों को निर्धारित जल वितरण प्रभावित हो।’’

यह विवाद केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी द्वारा सोमवार को राज्यसभा में पीएमके सांसद अंबुमणि रामदास के एक सवाल के लिखित जवाब में यह कहने के बाद शुरू हुआ कि कावेरी जल विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय के 16 फरवरी 2018 के ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया है कि कर्नाटक को कावेरी नदी पर कोई ढांचा बनाने से पहले तमिलनाडु, केरल या पुडुचेरी से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के 2018 के फैसले में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत कावेरी नदी पर ढांचा बनाने से पहले कर्नाटक के लिए निचले तटवर्ती राज्यों से मंजूरी लेना अनिवार्य हो।

मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि कावेरी नदी तमिलनाडु के 20 जिलों में पेयजल का प्रमुख स्रोत है और राज्य के उपजाऊ कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कृषि की जीवनरेखा भी है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कर्नाटक इस साल पहले ही तमिलनाडु को निर्धारित हिस्से का पानी समय पर जारी करने में विफल रहा है, जिससे कुरुवई धान की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है और कई क्षेत्रों में पेयजल संकट पैदा हुआ है।’’

पलानीस्वामी ने कहा कि कर्नाटक द्वारा मेकेदातु में जलाशय बनाने का कदम निचले क्षेत्रों में जल सुरक्षा को और खतरे में डाल देगा।

उन्होंने अन्नाद्रमुक सरकारों के लगातार प्रयासों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इन्हीं प्रयासों के कारण एक जून 2018 को कावेरी कार्यान्वयन योजना को राजपत्र में अधिसूचित किया गया और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) का गठन भी हुआ।

पलानीस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने 2017 और 2018 के बीच कई बार प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री को पत्र लिखकर तथा मुलाकात करके मेकेदातु बांध प्रस्ताव का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के नदी संबंधी अधिकारों को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई पर अन्नाद्रमुक चुप नहीं बैठेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘कावेरी नदी तमिलनाडु की जीवनरेखा है। वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने अच्छा फैसला दिया है। ऐसे में केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री द्वारा राज्यसभा में दिया गया जवाब तमिलनाडु के लोगों को स्तब्ध करने वाला है। इसलिए मेरा आग्रह है कि ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवालों का जवाब देते समय संबंधित राज्य के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।’’

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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