विभाजन की अनकही कहानियां लोगों के सामने आनी चाहिए : देवनानी

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विभाजन की अनकही कहानियां लोगों के सामने आनी चाहिए : देवनानी

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  • Publish Date - August 14, 2022 / 12:18 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:41 PM IST

जयपुर, 14 अगस्त (भाषा) राजस्थान से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक वासुदेव देवनानी ने 1947 के विभाजन के दौरान अपने परिवार के सदस्यों के दर्द और पीड़ा को याद करते हुए कहा कि विभाजन की अनकही कहानियां लोगों के सामने आनी चाहिए।

बंटवारे के संघर्ष और बलिदान के स्मरण दिवस पर देवनानी ने कहा, ‘‘मेरे बाबा (पिता) स्वर्गीय भावनदास जी अपने परिवार के साथ सिन्ध के नवाब शाह जिले के टंड़े आदम शहर में अपना घर, जमीन एवं अनाज का कारोबार छोड़ कर नंगे पांव पलायन के लिए बाध्य हुए। उन्होंने जोधपुर को केंद्र बनाकर सिन्ध से आये हिन्दुओं के पुनर्वास का काम किया।’’

उन्होंने कहा कि मेरे बाबा (पिता) स्वर्गीय भावनदास जी ने सिन्ध में अपना अनाज का कारोबार छोड़ कर विस्थापन के बाद यहाँ शून्य से शुरुआत की। उन्होंने अजमेर में काग़ज़ के लिफ़ाफ़े एवं चने बेचकर परिवार का स्वाभिमान के साथ जीविकोपार्जन किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने टंड़े आदम से एक जोड़ी कपड़े में पलायन किया था।

देवनानी ने कहा, ‘‘हमारे परिवार को विभाजन का दंश आज भी टीस बनकर चुभता हैं। मैंने धार्मिक विभाजन का दंश झेलने वाले अपने माँ-बाबा से बँटवारे का संघर्ष बचपन में सुना था, जिसे याद करने पर आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।’’

अजमेर (उत्तर) से भाजपा विधायक ने ट्वीट किया, ‘‘मेरी अम्मा का परिवार सिन्ध के जकोकाबाद में रहता था, विभाजन की त्रासदी में मेरे नाना एवं मामा वहीं रह गये। अपने घर एवं जड़ों के बीच उन्हें वर्षों तक अपमान सहने को अभिशप्त होना पड़ा। हमारे परिवार में विभाजन का दंश आज भी टीस बनकर चुभता है।’’

उन्होंने कहा कि 14 अगस्त का दिन ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने की न केवल याद दिलाएगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव की भावना भी मजबूत होगी।

देवनानी ने कहा कि संघ के कई स्वयंसेवकों ने विभाजन के दौरान विस्थापितों के लिए बनाए शिविरों में आवास, भोजन और दवा उपलब्ध कराने में मदद की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाने के लिये आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘आज जब हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तब विभाजन की व्यथा का अहसास भी हम सभी के लिए जानना उतना ही आवश्यक है।’’

भाषा कुंज

शोभना गोला

गोला