यूपीआई ने बैंकों की लेनदेन लागत कम की है, एमडीआर का कोई आधार नहीं : एसजेएम के अश्वनी महाजन

यूपीआई ने बैंकों की लेनदेन लागत कम की है, एमडीआर का कोई आधार नहीं : एसजेएम के अश्वनी महाजन

यूपीआई ने बैंकों की लेनदेन लागत कम की है, एमडीआर का कोई आधार नहीं : एसजेएम के अश्वनी महाजन
Modified Date: September 16, 2026 / 04:53 pm IST
Published Date: September 16, 2026 4:53 pm IST

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने बुधवार को कहा कि सरकार को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के किसी भी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए। मंच ने कहा कि लेनदेन से जुड़ी लागत को देखते हुए ऐसा कदम उचित नहीं है।

यह टिप्पणी सरकार की उस घोषणा के एक दिन बाद आई है, जिसमें 15 अक्टूबर से यूपीआई के माध्यम से 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही गई है, जबकि आम लोगों के बीच होने वाले रोजमर्रा के लेनदेन और छोटे भुगतानों को किसी भी शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यूपीआई के जरिये ऐसे भुगतान करने पर ग्राहकों को किसी तरह का शुल्क नहीं देना होगा।’

मंत्रालय ने यह भी कहा, ‘‘एमडीआर व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर लगाया जाने वाला शुल्क है। यह यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है।’

मंत्रालय ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत यूपीआई लेनदेन के लिए कोई मासिक कोटा या मुफ्त लेनदेन की संख्या पर सीमा नहीं होगी।

सोच-समझकर उठाया गया यह कदम ‘वास्तविक समय में भुगतान’ की दुनिया की सबसे बड़ी प्रणाली के लिए एक दौर के अंत का संकेत देता है। हालांकि, सरकार ने करोड़ों दैनिक उपयोगकर्ताओं के बीच किसी तरह की चिंता को रोकने की कोशिश की है।

एसजेएम के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने कहा कि बैंकों ने यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने वास्तव में एटीएम जैसी भौतिक बुनियादी सुविधाओं की जरूरत कम करके बैंकों की लेनदेन लागत घटाने में मदद की है।

महाजन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘किसी बैंक ने यूपीआई पर एमडीआर लगाने की मांग नहीं की है। वास्तव में, यूपीआई ने बैंकों की लेनदेन लागत कम की है। बड़ी संख्या में एटीएम बंद हो गए हैं, क्योंकि अब उनकी जरूरत नहीं रही। बैंकों को शून्य-एमडीआर व्यवस्था से खुश होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा और अन्य मदों पर होने वाले खर्च को यूपीआई पर एमडीआर लगाने के औचित्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

महाजन ने कहा, ‘‘साइबर सुरक्षा और इस तरह के अन्य खर्च बैंकों के अपने परिचालन का हिस्सा हैं। इन्हें यूपीआई से जुड़ी लागत नहीं माना जा सकता और एमडीआर लगाने के औचित्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।’’

यूपीआई की शून्य-एमडीआर व्यवस्था को लेकर यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) की ओर से उठाई गई चिंताओं का उल्लेख करते हुए महाजन ने कहा कि इससे सरकार के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव नहीं करने का कारण और मजबूत होता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की वीजा और मास्टरकार्ड जैसी कार्ड कंपनियों को यूपीआई के कारण बड़ा नुकसान हुआ है और भारत ने इन कार्ड कंपनियों को होने वाले विदेशी मुद्रा भुगतान में काफी बचत की है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी रिपोर्ट में उठाए गए दबाव या चिंताओं के कारण यह सब नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले इन सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए।’’

महाजन ने कहा कि सरकार को यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने के किसी भी कदम पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि इससे जुड़ी राशि इतनी अधिक नहीं है कि इस तरह का कदम उठाने की जरूरत हो।

उन्होंने कहा, ‘‘राशि इतनी बड़ी नहीं है कि एमडीआर लगाने के लिए इतनी होड़ मचे। सरकार को इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।’’

महाजन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में इस कदम को ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया। उन्होंने लिखा, ‘‘यूपीआई लेनदेन शुल्क बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह भारत की उस उपलब्धि को कमतर करता है, जिसकी वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है। नीति-निर्माताओं ने यूपीआई के कारण कम हुई लॉजिस्टिक लागत को ध्यान में नहीं रखा, जिसने भारत को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।’’

इस कदम को लेकर विपक्षी दलों की ओर से भी तीखी आलोचना की गई है।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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