ब्रिक्स बाजार में दिखी ईरान की शानदार रश्ती कढ़ाई, ब्राजील की शिल्प कला और बेलारूस की बेंत बुनाई

ब्रिक्स बाजार में दिखी ईरान की शानदार रश्ती कढ़ाई, ब्राजील की शिल्प कला और बेलारूस की बेंत बुनाई

ब्रिक्स बाजार में दिखी ईरान की शानदार रश्ती कढ़ाई, ब्राजील की शिल्प कला और बेलारूस की बेंत बुनाई
Modified Date: September 16, 2026 / 04:59 pm IST
Published Date: September 16, 2026 4:59 pm IST

(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, समूह से जुड़े देशों के ब्रिक्स बाजार ने ईरान की शानदार रश्ती कढ़ाई, ब्राजील की मिट्टी कला और बेलारूस की पारंपरिक बेंत बुनाई सहित विभिन्न संस्कृतियों की हस्तकला एवं शिल्पकला को एक मंच पर लाया।

ब्रिक्स बाजार में, मेजबान देश भारत समेत 18 देश के स्टॉल लगाए गए थे। यह बाजार प्रतिभागियों, कारीगरों और आगंतुकों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक मंच भी बना।

यह हस्तकला एवं शिल्पकला बाजार यहां भारत मंडपम परिसर के पास नेशनल क्राफ़्ट्स म्यूजियम और हस्तकला अकादमी के परिसर में लगाया गया था। भारत मंडपम परिसर में 12-13 सितंबर को भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था।

ब्रिक्स बाजार 10 से 15 सितंबर तक लगाया गया, जिसमें शुरुआती चार दिन खास मेहमानों के लिए थे। इसे सोमवार को आम लोगों के लिए खोला गया और मंगलवार शाम को यह बंद हो गया। हालांकि, इसके आम लोगों के लिए खुले रहने के दौरान लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।

इस बाजार में भारत समेत कई सदस्य देशों और इस समूह के सहयोगी देशों के कारीगर और शिल्पकार शामिल हुए।

प्रवेश द्वार के पास, सदस्य और सहयोगी देशों को दर्शाने वाले कपड़ों से एक विशेष पृष्ठभूमि बनाई गई थी। इन कपड़ों को बीच में बांधा गया था जो ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।

आधिकारिक ब्रिक्स 2026 वेबसाइट के अनुसार, ब्रिक्स बाजार में सदस्य और सहयोगी देशों की हस्तशिल्प, हथकरघा, वस्त्र और कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया।

शुरुआत में ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका शामिल थे, लेकिन 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया। वहीं 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हुआ।

बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने।

‘पीटीआई-भाषा’ ने ब्राजील, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और इथियोपिया जैसे देशों के कुछ कारीगरों से बातचीत की।

ईरान के स्टॉल पर दो कारीगर मौजूद थीं — ज़ाहेदान शहर की रहने वाली नादिया करीमी, जो बलोची कढ़ाई की पारंपरिक कला को संरक्षित करने और उसे आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं; और अमिनेह सदेगी, जो गिलान की पारंपरिक सिलाई कला को बढ़ावा दे रहीं और उसे विकसित कर रही हैं — और उनके स्टॉल पर काफी संख्या में लोग आए थे।

सदेगी ईरान के उत्तरी क्षेत्र से आई थीं। उन्होंने मंगलवार शाम ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैंने 20 साल की उम्र में पारंपरिक कढ़ाई सीखना शुरू किया था। मैं 30 साल से पारंपरिक ईरानी कढ़ाई सिखा रही हूं।’’

सदेगी का मुख्य काम सुई-धागे से कढ़ाई करना है, खासकर सूती कपड़े पर शीशे का काम और ‘चेन स्टिच’। उनका काम गिलान की पारंपरिक सिलाई कला, खासकर रश्ती कढ़ाई को आगे बढ़ाता है और साथ ही पारंपरिक कढ़ाई को आज के दौर के उत्पादों के हिसाब से ढालता है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की बेटी जहरा पेजेश्कियान 12 सितंबर को कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच इस बाजार में पहुंची थीं। उनके साथ कुछ अन्य मेहमान भी थे।

वह ईरान के स्टॉल पर भी गई थीं और कारीगरों से बातचीत की।

ब्राजील के गोइआस की रहने वाली सिरेमिक शिल्पकार और मूर्तिकार क्लेज़ियानिया रिबेरो डी लीमा पाइवा ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से भारत में रहकर और यहां की समृद्ध संस्कृति से रुबरु होकर करके मुझे बहुत खुशी हुई। यह एक शानदार अनुभव रहा।’’

मिट्टी की कलाकृतियों से उनका रिश्ता बचपन में ही शुरू हो गया था, जब उन्होंने अपनी मां को मिट्टी के बर्तन बनाते हुए देखा था। लगभग 11 साल की उम्र में, उन्होंने रोजमर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी आकृतियां बनाना शुरू कर दिया।

वेबसाइट के अनुसार, बचपन में शुरू हुआ यह प्रयोग धीरे-धीरे एक कलात्मक काम में बदल गया, जिसे वह आज भी आगे बढ़ा रही हैं।

क्लेज़ियानिया मुख्य रूप से जैविक मिट्टी से कलाकृतियां और सजावटी मूर्तियां बनाती हैं।

भाषा

सुभाष मनीषा

मनीषा


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