यूपीएससी वैकल्पिक विषय अंक विवाद: आरटीआई आवेदक, डीओपीटी ने कोचिंग संस्थानों के प्रति आगाह किया
यूपीएससी वैकल्पिक विषय अंक विवाद: आरटीआई आवेदक, डीओपीटी ने कोचिंग संस्थानों के प्रति आगाह किया
(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की मुख्य परीक्षा के अंकों के खुलासे से संबंधित विवाद में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के समक्ष एक असामान्य सहमति बनी है, जिसमें आरटीआई आवेदक और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) दोनों का तर्क है कि कोचिंग संस्थान वैकल्पिक विषयों से संबंधित सूचना का दुरुपयोग कर सकते हैं।
वर्ष 2017 के बाद सिविल सेवा परीक्षा में अनुशंसित अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्र-वार अंकों के खुलासे की मांग करने वाली आरटीआई अपील की सुनवाई करते हुए, सीआईसी ने अपीलकर्ता के इस निवेदन को दर्ज किया कि ‘‘पारदर्शिता की इस कमी से उत्पन्न मुख्य समस्या यह है कि यह विभिन्न कोचिंग संस्थानों को संभावित अभ्यर्थियों का शोषण करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करती है।’’
अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि ‘‘कई कोचिंग संस्थान झूठे, अतिरंजित और अप्रमाणित विज्ञापनों का सहारा लेते हैं, जिससे छात्रों को यह विश्वास हो जाता है कि इनके द्वारा पढ़ाए गए अभ्यर्थियों ने विशेष वैकल्पिक विषयों में उच्चतम अंक प्राप्त किए हैं।’’
आदेश के अनुसार, अपीलकर्ता ने कहा कि अभ्यर्थियों को अक्सर ‘‘प्रमाणित प्रदर्शन रुझानों के आधार पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से कोचिंग संस्थानों द्वारा किये गए प्रचार के कारण एक रूढ़िवादी ‘बाजार-मान्यता प्राप्त वैकल्पिक विषय’ चुनने के लिए गुमराह किया जाता है।’’
सुनवाई में, विभाग ने चिंता व्यक्त की कि विषयवार अंकों के विस्तृत खुलासे का कोचिंग संस्थानों द्वारा व्यावसायिक रूप से दुरुपयोग किया जा सकता है।
सीआईसी के आदेश में कहा गया है कि डीओपीटी के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने दलील दी कि ‘‘यह आशंका है कि अनुशंसित अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त अंकों के विभाजन से संबंधित विस्तृत डेटा का खुलासा, विशेष रूप से सिविल सेवा परीक्षा में विषयवार प्रदर्शन और वैकल्पिक विषय के चयन से संबंधित डेटा के खुलासे का कोचिंग संस्थानों द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है। जो (कोचिंग संस्थान) विज्ञापनों में कुछ वैकल्पिक विषयों को ‘उच्च अंक दिलाने वाले’ के रूप में चुनिंदा तरीके से पेश कर सकते हैं और इस प्रकार अभ्यर्थियों के बीच भ्रामक धारणाएं पैदा कर सकते हैं।’’
यह मामला सिविल सेवा परीक्षा में सामान्य अध्ययन, वैकल्पिक विषयों और व्यक्तित्व परीक्षण (साक्षात्कार) में अनुशंसित अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त अंकों का 10 वर्षों का विस्तृत विवरण मांगने वाले अनिकेत कुमार गुप्ता द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर आवेदन से संबंधित है।
आवेदक ने दलील दी कि सिविल सेवा परीक्षा-2017 तक, यूपीएससी अनुशंसित अभ्यर्थियों के पेपर-वार अंक सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करता था, लेकिन 2018 से केवल कुल अंक ही प्रकाशित किए जाने लगे, जिससे ‘‘पारदर्शिता में काफी कमी आई।’’
डीओपीटी ने विषयवार अंकों के प्रकाशन को बंद करने का बचाव करते हुए कहा कि ऐसे विस्तृत अंक ‘‘प्रत्येक अभ्यर्थी से संबंधित निजी जानकारी’’ माने जाते हैं।
हालांकि, सीआईसी ने पाया कि ‘‘इस परंपरा को बंद करने का आधार संतोषजनक ढंग से स्पष्ट नहीं किया गया है’’ और यह भी कहा कि इसके समर्थन में कोई परिपत्र, नीतिगत निर्णय या फाइल नोटिंग प्रस्तुत नहीं की गई है।
सूचना आयुक्त आनंदी रामलिंगम ने विभाग को अभिलेखों के साथ विस्तृत लिखित विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसमें मुख्य परीक्षा के अंकों के विभाजन का प्रकाशन बंद करने के कारणों और ‘‘सिविल सेवा परीक्षा में अनुशंसित अभ्यर्थियों के अंकों के विभाजन के प्रकाशन की परंपरा को पुनः शुरू करने की सिफारिश आयोग द्वारा क्यों नहीं की जानी चाहिए’’ के बारे में स्पष्टीकरण दिया गया हो।
भाषा सुभाष माधव
माधव

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