देश में बिजली की मांग बढ़ने का मुख्य कारण ‘अर्बन हीट आईलैंड’ है: विश्लेषण

देश में बिजली की मांग बढ़ने का मुख्य कारण ‘अर्बन हीट आईलैंड’ है: विश्लेषण

देश में बिजली की मांग बढ़ने का मुख्य कारण ‘अर्बन हीट आईलैंड’ है: विश्लेषण
Modified Date: May 26, 2026 / 09:52 pm IST
Published Date: May 26, 2026 9:52 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) देश में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (यूएचआई) प्रभाव बिजली की मांग बढ़ने के प्रमुख कारणों में से एक है। एक नए विश्लेषण में यह बात सामने आई है।

‘यूएचआई’ एक ऐसी स्थिति है जिसमें शहरों का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में दो से 10 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है।

विश्लेषण में कहा गया है कि कई क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली बिजली की मांग अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है, लेकिन घरेलू मांग में तेज वृद्धि हुई है क्योंकि शहरों में विशेषकर शाम और रात के समय काफी अधिक गर्मी हो जाती है।

दिल्ली में स्थित जलवायु अनुसंधान संस्था ‘क्लाइमेट ट्रेंड्स’ के मंगलवार को जारी इस विश्लेषण के अनुसार भीषण गर्मी की वजह से घरों में एयर कंडीशनर (एसी), कूलर और पंखों पर निर्भरता बढ़ रही है।

विश्लेषण में कहा गया है, “केवल बढ़ते तापमान की वजह से गर्मी में शहरों और कस्बों में रहना लगतार मुश्किल नहीं हो रहा है। तेज शहरीकरण के कारण गर्मी का दबाव काफी बढ़ रहा है, जिससे भारतीय शहर विशाल ‘हीट ट्रैप’ में बदल रहे हैं और बिजली की मांग में तेज वृद्धि हो रही है।”

हाल के दिनों में भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है, जो 18 मई को 257.3 गीगावॉट, 19 मई को 260.4 गीगावॉट, 20 मई को 265 गीगावॉट और 21 मई को रिकॉर्ड 270.8 गीगावॉट तक पहुंच गई।

विश्लेषण के अनुसार यूएचआई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण तेजी से हो रहा शहरीकरण है। इसमें कहा गया है कि शहरों में इमारतें, सड़कें कंक्रीट की होती हैं और ईंट व लोहे जैसी चीजों का काफी इस्तेमाल होता है।

विश्लेषण के अनुसार ये चीजें दिन में सूरज की गर्मी को अपने अंदर जमा कर लेती हैं और रात में धीरे-धीरे बाहर छोड़ती रहती हैं, इसी वजह से शहरों में रात में भी ज्यादा गर्मी रहती है।

विश्लेषण के मुताबिक स्थिति एसी के इस्तेमाल से और खराब होती है, क्योंकि एसी गर्म हवा बाहर छोड़ते हैं, जो यूएचआई प्रभाव को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विश्लेषण में कहा गया है, “दोपहर से लेकर रात और सुबह तक घरों व दफ्तरों में एसी और कूलर जैसे कूलिंग उपकरणों की जरूरत लगातार बनी रहती है और कम नहीं होती, जिसकी वजह से बिजली की मांग पूरी करते रहना बहुत मुश्किल हो गया है।”

विश्लेषण में यूएचआई के प्रभाव को कम करने के लिए छतों के निर्माण में हल्के रंग और सूरज की गर्मी को वापस मोड़ देने की क्षमता वाली सामग्री को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है।

विश्लेषण में कहा गया है कि इससे गर्मी का अवशोषण काफी कम हो सकता है और गहरे रंग की सामग्री की तुलना में छत का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है।

भाषा जोहेब माधव

माधव


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