अमेरिका के विदेश मंत्री रूबियो भारत पहुंचे
अमेरिका के विदेश मंत्री रूबियो भारत पहुंचे
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के तहत शनिवार को नयी दिल्ली पहुंचे। इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को सुधारना है, जिनमें पिछले साल के मध्य से ही तनाव बना हुआ है।
रूबियो विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे और नयी दिल्ली में ‘क्वाड’ देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
रूबियो अपनी भारत यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की। शनिवार सुबह पूर्वी भारत के इस महानगर पहुंचने के बाद उन्होंने सेंट टेरेसा मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय मदर हाउस का दौरा किया। रूबियो कोलकाता से दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहां प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित है।
रूबियो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘‘भारत पहुंच गया हूं। एक शानदार यात्रा की उम्मीद है।’’
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने विदेश मंत्री रूबियो का स्वागत करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से एक दूरदर्शी एजेंडा प्रस्तुत किया। उन्होंने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मजबूत अमेरिका-भारत साझेदारी के रणनीतिक दृष्टिकोण को साकार करने पर वाशिंगटन द्वारा ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया।
रूबियो रविवार को जयशंकर साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और अमेरिकी दूतावास के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे और फिर मंगलवार सुबह क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए दिल्ली लौटेंगे।
मामले के बारे में जानकारी रखने वालों के अनुसार, जयशंकर और रूबियो के बीच होने वाली वार्ता में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान के क्षेत्रों में भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है।
दोनों पक्षों द्वारा पश्चिम एशिया संकट और इसके ऊर्जा आपूर्ति सहित आर्थिक प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है।
रूबियो की भारत यात्रा विदेश सचिव विक्रम मिसरी की वाशिंगटन डीसी की तीन दिवसीय यात्रा के पांच सप्ताह से अधिक समय बाद हो रही है, जिसका उद्देश्य अनिश्चितता और तनाव के दौर के बाद संबंधों को स्थिर करना था।
दोनों देशों के संबंधों में उस समय तनाव देखने को मिला था जब अमेरिका ने भारत पर शुल्क लगाए थे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को कम करने में अपनी भूमिका को लेकर विवादित दावे किए थे।
इसके बाद, अगले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने दोनों पड़ोसी देशों के बीच सैन्य संघर्ष को सुलझाया और लाखों लोगों की जान बचाई, क्योंकि स्थिति पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रही थी।
भारत दृढ़ता से कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के परिणाम के आधार पर संघर्ष समाप्त हुआ था और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।
अमेरिका की नयी आव्रजन नीति और एच1 बी वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले से भी दोनों देशों के संबंधों में खटास पैदा हुई।
हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने के प्रयास किए हैं। दोनों देशों ने जल्द ही पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का संकल्प लिया है।
ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच 14 अप्रैल को लगभग 40 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। इस बातचीत के बाद मोदी ने कहा कि उन्होंने और ट्रंप ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई ‘‘महत्वपूर्ण प्रगति’’ की समीक्षा की और दोनों पक्ष ‘‘सभी क्षेत्रों’’ में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भाषा अमित धीरज
धीरज

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