सुरक्षित सड़कों का इस्तेमाल जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग: हरियाणा मानवाधिकार आयोग

सुरक्षित सड़कों का इस्तेमाल जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग: हरियाणा मानवाधिकार आयोग

सुरक्षित सड़कों का इस्तेमाल जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग: हरियाणा मानवाधिकार आयोग
Modified Date: January 16, 2026 / 01:36 pm IST
Published Date: January 16, 2026 1:36 pm IST

चंडीगढ़, 16 जनवरी (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि सुरक्षित सड़कें केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवाधिकार संबधी अनिवार्यता है और नागरिक सुरक्षित सड़कों का इस्तेमाल करें, यह संविधान के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।

आयोग ने कहा कि सड़क स्वामित्व या रखरखाव करने वाले प्राधिकरण की ओर से बुनियादी सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोई भी चूक या विफलता सड़क उपयोगकर्ताओं को अनावश्यक जोखिमों में डालती है, जिसके परिणामस्वरूप उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है।

आयोग ने टिप्पणी की कि राज्य और उसके संस्थानों का संवैधानिक कर्तव्य है कि वे सुरक्षित सार्वजनिक सड़क मुहैया कराएं और उसका रखरखाव करें, और इस संबंध में लापरवाही नागरिकों के मौलिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। क्योंकि उन्हें अपने जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डाले बगैर स्वतंत्र रूप से और सुरक्षित रूप से घूमने का अधिकार है।

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एक शिकायत की सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति ललित बत्रा (अध्यक्ष) और सदस्यों कुलदीप जैन तथा दीप भाटिया सहित पूर्ण आयोग ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़क), हरियाणा राज्य सड़क एवं पुल विकास निगम, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम और यातायात पुलिस सहित सभी अधिकारियों से व्यापक रिपोर्ट मांगी।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, यातायात और राजमार्ग (हरियाणा) की भूमिका और जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए न्यायमूर्ति बत्रा ने आठ जनवरी के अपने आदेश में कहा कि अपने नागरिकों के जीवन और सुरक्षा की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक कर्तव्य है।

न्यायमूर्ति बत्रा ने सभी संबंधित अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए, जिनमें हरियाणा की सभी प्रमुख सड़कों पर केंद्रीय विभाजकों/डिवाइडरों का उचित विकास और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना शामिल है।

भाषा शोभना वैभव

वैभव


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