प्रौद्योगिकी का उपयोग करें, जवाबदेही सुनिश्चित करें: कर्नाटक लोकायुक्त से प्रधान न्यायाधीश ने कहा

प्रौद्योगिकी का उपयोग करें, जवाबदेही सुनिश्चित करें: कर्नाटक लोकायुक्त से प्रधान न्यायाधीश ने कहा

प्रौद्योगिकी का उपयोग करें, जवाबदेही सुनिश्चित करें:  कर्नाटक लोकायुक्त से प्रधान न्यायाधीश ने कहा
Modified Date: April 18, 2026 / 10:11 pm IST
Published Date: April 18, 2026 10:11 pm IST

बेंगलुरु, 18 अप्रैल (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कर्नाटक लोकायुक्त से आह्वान किया कि वह प्रौद्योगिकी का उपयोग करके नवाचार जारी रखें, अपनी पहुंच को और व्यापक बनाएं और जवाबदेही को एक साझा सिद्धांत के रूप में स्थापित करें।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि लोकायुक्त द्वारा सेवा के चार दशक पूरे करने के साथ ही उसकी यात्रा यह दर्शाती है कि संवैधानिक मूल्य अपने संस्थापक उद्देश्य के प्रति निष्ठावान रहते हुए भी बदलती आवश्यकताओं के साथ कैसे विकसित होते रह सकते हैं।

सीजेआई ‘कर्नाटक लोकायुक्त की यात्रा’ के चार दशकों के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए संपत्ति और देनदारियों का पोर्टल और एक ऑनलाइन जांच मॉड्यूल की शुरुआत की गयी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘आज के नागरिक समय पर सूचना तक पहुंच और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के आचरण के बारे में अधिक स्पष्टता चाहते हैं। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हमें एक ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है, जो व्यावहारिक और मापने योग्य तरीकों से पारदर्शिता को बढ़ावा दे। इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आज का यह समारोह पूरे कर्नाटक के निर्वाचित प्रतिनिधियों की संपत्ति और देनदारियों के विवरण वाले एक डिजिटल पोर्टल के उद्घाटन के साथ मेल खाता है।’

उन्होंने कहा कि जब इस तरह की जानकारियां नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं तो पारदर्शिता, वादे से व्यवहार में बदल जाती है और सार्वजनिक जीवन के रोजमर्रा की कार्यप्रणाली का हिस्सा बन जाती है।

उन्होंने आगे कहा, ‘लोकायुक्त द्वारा सेवा के चार दशक पूरे होने पर उसकी यात्रा यह दर्शाती है कि संवैधानिक मूल्य बदलती आवश्यकताओं के साथ कैसे विकसित होते रह सकते हैं, जबकि वे अपने मूल उद्देश्य के प्रति भी निष्ठावान बने रहते हैं। ऐसी संस्थाओं का वास्तविक आकलन केवल उनके द्वारा लिये गए निर्णयों में ही नहीं, बल्कि समाज में उनके द्वारा निर्मित विश्वास में निहित है। यह विश्वास लोकतंत्र की सबसे मूल्यवान सुरक्षाओं में से एक है और इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।’

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार, लोकायुक्त बीएस पाटिल, उपलोकायुक्त केएन फणींद्र और बी वीरप्पा, राज्य के महाधिवक्ता के शशि किरण शेट्टी और मुख्य सचिव शालिनी रजनीश उपस्थित थे।

भाषा

शुभम सुरेश

सुरेश


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