सरकारी योजनाओं के प्रचार में सेना का इस्तेमाल गैरकानूनी, फौज को कमजोर किया जा रहा : कांग्रेस
सरकारी योजनाओं के प्रचार में सेना का इस्तेमाल गैरकानूनी, फौज को कमजोर किया जा रहा : कांग्रेस
नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने सरकार की प्रमुख योजनाओं के प्रचार के काम में सैन्य और रक्षा प्रतिष्ठानों को भी कथित तौर पर शामिल किए जाने को लेकर शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए सेना का इस्तेमाल कर उसे कमजोर कर रही है।
पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के प्रमुख कर्नल (सेवानिवृत्त) रोहित चौधरी ने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम सत्ता का दुरुपयोग है और गैरकानूनी भी है।
कुछ खबरों में कहा गया है कि केंद्र की प्रमुख योजनाओं जैसे नारी सशक्तिकरण, उज्ज्वला, आत्मनिर्भर और सक्षम भारत को जनता के बीच ले जाने के काम में अब सैन्य और रक्षा प्रतिष्ठानों को भी शामिल किया जा रहा है। इन खबरों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने सेना, वायुसेना और नौसेना के अलावा डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) व बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) को 9 शहरों में सेल्फी पॉइंट्स बनाने को कहा है।
चौधरी ने संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया, ‘‘मोदी सरकार ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए सेना के हाथ में सरकारी योजनाओं के पोस्टर थमा दिए हैं। रक्षा विभाग ने एक परिपत्र जारी किया है, जिसके तहत देश में मोदी सरकार की योजनाओं से जुड़े 822 सेल्फी पॉइंट्स बनेंगे। इन्हें बनाने के लिए देश की सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से गलत है और सत्ता का दुरुपयोग है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘देश की सरकार फौज पर एक के बाद एक प्रहार कर रही है। वह हमारी फौज को कमजोर कर रही है।
चौधरी ने सवाल किया, ‘‘क्या हमारे देश के सैनिक अब भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रचार करेंगे? क्या हमने फौज का स्तर इतना गिरा दिया है? जो सैनिक बेहद मुश्किल हालातों में देश की सीमा पर खड़े होते हैं, वे अब मोदी सरकार की योजनाओं का प्रचार करेंगे?’’
कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘जो व्यक्ति सेना अधिनियम, नौसेना अधिनियम, वायुसेना अधिनियम के अंदर आते हैं, उनके लिए किसी भी तरह की राजनीतिक पार्टी के वास्ते प्रचार करना वर्जित है। मोदी सरकार हमारे सैनिकों का अपमान कर रही है।’’
चौधरी ने कहा, ‘‘सेना और सैनिक, दोनों ही देश की धरोहर हैं। यह किसी राजनीतिक पार्टी की निजी संपत्ति नहीं हैं।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘सेना, वायुसेना और नौसेना ने अपनी वेबसाइट पर सरकार के आदेश को नहीं डाला है। इसका मतलब वह इसे गैर-कानूनी मान रहे हैं।’’
भाषा हक
हक मनीषा
मनीषा


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