उत्तराखंड: सरकार ने ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य के प्रस्ताव को मंजूरी दी

उत्तराखंड: सरकार ने ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य के प्रस्ताव को मंजूरी दी

उत्तराखंड: सरकार ने ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य के प्रस्ताव को मंजूरी दी
Modified Date: June 19, 2026 / 12:25 pm IST
Published Date: June 19, 2026 12:25 pm IST

देहरादून, 19 जून (भाषा) उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मानकों के आधार पर राज्य को ‘पूर्ण साक्षर’ घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गयी।

प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने यहां बताया कि उत्तराखंड में उल्लास (अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी) कार्यक्रम के तहत निर्धारित साक्षरता मानकों को पूरा कर लिया गया है और वर्तमान में राज्य की साक्षरता दर 98 फीसदी से अधिक है।

मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

उल्लास के तहत प्रदेश में वयस्कों के लिये बुनियादी साक्षरता, महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल, बुनियादी शिक्षा और सतत शिक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

इस योजना के तहत सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लिया गया और निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाया गया, जिनमें मुख्य रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समूहों को शामिल गया गया।

योजना में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई, जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को अब तक पांच राज्यों मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम हासिल कर चुके हैं।

उल्लास के तहत जब किसी राज्य में वयस्कों की साक्षरता दर करीब 95 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो जाती है और गैर-साक्षर लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा हो जाता है, तब उसे ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य माना जाता है।

भाषा दीप्ति

मनीषा जितेंद्र

जितेंद्र


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