पिथौरागढ़ (उत्तराखंड), 14 जून (भाषा) पिथौरागढ़ में सीमावर्ती सड़कों के किनारे खड़ी पहाड़ी ढलानों पर मौजूद भारी और अस्थिर चट्टानें पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय बन गई हैं। स्थानीय लोगों ने रविवार को बताया कि बारिश या भूकंपीय गतिविधियों के कारण संतुलन खो चुकी ये चट्टानें अक्सर नीचे गिर जाती हैं, जिससे क्षेत्र में घातक हादसे होते हैं।
ये प्रभावित मार्ग निचली घाटियों को चीन सीमा और आदि कैलाश तथा पंचाचूली आधार शिविर जैसे प्रमुख धार्मिक व पर्यटक स्थलों से जोड़ते हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि दारमा घाटी में 50 किलोमीटर और ब्यास घाटी में 75 किलोमीटर लंबी सड़क क्रमशः 2018 और 2020 में चालू हो गई थी, लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र में सड़क निर्माण के बाद इन अस्थिर चट्टानों को हटाने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
दारमा घाटी के निवासी और वर्तमान में धारचूला में रह रहे शालू दयाल ने बताया कि हाल ही में दारमा घाटी के पांगबावे में हुआ हादसा पहाड़ी से चट्टान गिरने के कारण ही हुआ था जिसमें राजस्थान के दो तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी और चार अन्य घायल हो गए थे।
दयाल ने कहा कि पांगबावे के इस तरह की घटनाओं के प्रति बेहद संवेदनशील होने के बावजूद, इन ढीली चट्टानों को हटाने के लिए कोई उपाय लागू नहीं किए गए हैं।
धारचूला के स्थानीय सूत्रों ने दो साल पहले लामारी पॉइंट पर हुई ऐसी ही एक त्रासदी को याद किया, जहां एक भारी चट्टान की चपेट में आने से वाहन सवार सात लोगों की मौत हो गई थी।
दयाल ने इस बात पर जोर दिया कि ये चट्टानें 2020 में घटियाबगड़-लिपुलेख सड़क निर्माण के लिए पहाड़ियों की कटाई के बाद सामने आई थीं और अब भी खड़ी पहाड़ियों पर इस तरह फंसी हैं कि भूगर्भीय या मौसम में बदलाव के दौरान कभी भी गिर सकती हैं।
धारचूला के व्यापार मंडल ने सरकार से इन खतरों को दूर करने के लिए एक विशेष परियोजना शुरू करने की मांग की है।
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