उत्तराखंड: हर की पौड़ी पर शेख के लिबास में दो युवकों का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस जांच में जुटी

उत्तराखंड: हर की पौड़ी पर शेख के लिबास में दो युवकों का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस जांच में जुटी

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 09:24 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 09:24 PM IST

हरिद्वार, 13 जनवरी (भाषा) हरिद्वार में गंगा के मुख्य स्नान घाट हर की पौड़ी पर मंगलवार को शेख के लिबास (कंदूरा) में दो युवकों का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस जांच में जुटी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

हरिद्वार कुंभ मेला क्षेत्र में स्थित सभी गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग के बीच हर की पौड़ी में मालवीय घाट और उसके आसपास घूमते इन युवकों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से हड़कंप मच गया।

इसके बाद तीर्थ पुरोहितों ने इसकी जानकारी अपनी संस्था गंगा सभा को दी, जिन्होंने पुलिस को सूचित किया। हालांकि, गंगा सभा के पदाधिकारियों और पुलिस के पहुंचने से पहले युवक वहां से निकल गए।

पुरोहितों ने बताया कि कंदूरा में घूम रहे युवकों को रोककर उनसे सवाल किए, तो उन्होंने अपना नाम दुबई निवासी हबीबुल्ला और हबीबी बताया। और सवाल किए जाने पर उन्होंने खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर बताते हुए यूट्यूब के लिए वीडियो बनाने की बात कही।

वायरल वीडियो में दिख रहे युवकों में से एक हबीबुल्ला को कहते सुना जा सकता है, ‘‘वे हिंदुस्तान में कहीं भी घूम सकते हैं।’’ इसके बाद उन्हें आराम से हर की पौड़ी पर घूमते देखा जा सकता है।

गंगा सभा के पदाधिकारी उज्जवल पंडित ने कहा कि इन दोनों युवकों की जानकारी मिलने पर तलाश शुरू की गई, लेकिन तब तक वे जा चुके थे। पंडित ने आरोप लगाया कि वीडियो से साफ है कि जानबूझकर हर की पौड़ी के माहौल को खराब करने की कोशिश की गई।

अधिकारियों ने बताया कि ये युवक कहां से आए और किस उद्देश्य से धार्मिक क्षेत्र में इस लिबास में मौजूद थे, इन सभी पहलुओं से पुलिस व प्रशासन जांच कर रहा है।

हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

हाल में गंगा सभा और संत समाज की ओर से हर की पौड़ी समेत कुंभ मेला क्षेत्र के सभी गंगा घाटों को गैर हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की मांग की गई है, जिस पर उत्तराखंड सरकार भी गंभीरता से विचार कर रही है।

भाषा सं दीप्ति खारी

खारी