tcs employee/ image source: meta AI
नई दिल्ली: 2025 में Tata Consultancy Services (TCS) ने कंपनी में बड़े पैमाने पर TCS Firing Employees की घोषणा की थी। इस कदम के तहत कई कर्मचारियों की नौकरी छिन गई थी। अब कंपनी ने साफ कर दिया है कि यह छंटनी का सिलसिला 2026 में भी जारी रहेगा। तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद TCS ने कहा कि कर्मचारी बाहर जाएंगे, लेकिन किसी तय संख्या को लक्ष्य नहीं बनाया गया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी टर्मिनेशन वैध कारणों और आंतरिक प्रक्रिया के तहत किए जाएंगे, बावजूद इसके कि कुल कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है।
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, TCS के CHRO सुधीप कुणुमल ने बताया कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में लगभग 1800 कर्मचारियों को कंपनी ने हटाया। हालांकि, कंपनी के तिमाही तथ्य-पत्र के अनुसार कुल कर्मचारियों की संख्या में 11,151 की गिरावट दर्ज की गई। इसका मतलब यह है कि इस अवधि में TCS Firing Employees दो तरह से हुई, एक तो कंपनी द्वारा प्रक्रिया के तहत हटाए गए 1800 कर्मचारी और दूसरी ओर, स्वैच्छिक निकासी यानी कर्मचारियों का खुद छोड़ना। जब कोई कर्मचारी निकला, TCS ने उसकी जगह नई भर्ती नहीं की।
इस गिरावट के बाद दिसंबर के अंत में TCS के कुल कर्मचारियों की संख्या 5,82,163 रह गई, जो पिछले तिमाही के 5,93,314 से कम है। लगातार दो तिमाहियों में TCS Firing Employees के बाद अब कंपनी का हेडकाउंट छह लाख से नीचे चला गया है। पिछले छह महीनों में कुल लगभग 30,000 कर्मचारियों की संख्या कम हुई है।
हालांकि TCS ने AI को TCS Firing Employees की वजह बताया है, लेकिन Oxford Economics की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश हालिया छंटनी AI से सीधे नहीं जुड़ी। इसके पीछे उद्देश्य अक्सर नॉन-परफॉर्मर्स को हटाना और कार्यबल का ऑप्टिमाइज़ेशन करना होता है। खर्च कम करना भी एक बड़ा कारण हो सकता है।
TCS ने हाल ही में वर्क-फ्रॉम-ऑफिस नियम कड़े किए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ कर्मचारियों की एप्रेज़ल रद्द या स्थगित कर दी गई क्योंकि उन्होंने ऑफिस अटेंडेंस मानकों का पालन नहीं किया। आंतरिक संदेशों में चेतावनी दी गई है कि अगर नियमों का पालन नहीं किया गया, तो 2026 की परफॉर्मेंस रेटिंग से कर्मचारी वंचित हो सकते हैं।