उर्दू विज्ञापन को लेकर भाजपा और कर्नाटक के मंत्री के बीच वाक् युद्ध

उर्दू विज्ञापन को लेकर भाजपा और कर्नाटक के मंत्री के बीच वाक् युद्ध

उर्दू विज्ञापन को लेकर भाजपा और कर्नाटक के मंत्री के बीच वाक् युद्ध
Modified Date: February 25, 2026 / 10:30 pm IST
Published Date: February 25, 2026 10:30 pm IST

बेंगलुरु, 25 फरवरी (भाषा) कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यक्रम को लेकर उर्दू अखबार में प्रकाशित विज्ञापन पर तीखा वाक् युद्ध हुआ।

कर्नाटक सरकार ने आज हीमोफीलिया के मरीजों के लिए ‘प्रोफिलैक्टिक उपचार’ और निःशुल्क एंबुलेंस सेवाओं से जुड़ा ‘कुसुमा संजीवनी’ कार्यक्रम शुरू किया।

इस कार्यक्रम के विज्ञापन विभिन्न प्रकाशनों में प्रकाशित किए गए, जिनमें कर्नाटक से निकलने वाले कुछ उर्दू दैनिक समाचारपत्र भी शामिल हैं।

उर्दू दैनिकों में प्रकाशित विज्ञापन उर्दू भाषा में थे, जो अब विवाद का कारण बन गए हैं।

भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर कन्नड़ की अनदेखी करने और कथित तौर पर उर्दू में आधिकारिक निमंत्रण जारी कर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं, मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि यह अखबार में प्रकाशित विज्ञापन भर था और इसका उद्देश्य उर्दू पाठकों तक जानकारी पहुंचाना था।

भाजपा ने सरकार से सवाल करते हुए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार – क्या कर्नाटक की प्रशासनिक भाषा उर्दू है या कन्नड़?’’

भाजपा ने स्वास्थ्य मंत्री पर भी निशाना साधते हुए पूछा, ‘सिर्फ इसलिए कि आप घर पर उर्दू बोलते हैं, आपको उर्दू में आधिकारिक सरकारी निमंत्रण जारी करने का अधिकार किसने दिया?’

पार्टी ने राव से कहा, ‘आप चाहें तो अपने घर में उर्दू बोलें, लेकिन याद रखें कि कन्नड़ कर्नाटक की प्रशासनिक भाषा है।’

‘उर्दू बोलो’ तंज स्पष्ट रूप से राव की पत्नी तबस्सुम पर लक्षित था, जो मुस्लिम हैं और अक्सर भाजपा नेता उन्हें निशाना बनाते हैं।

राव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, ‘‘ क्या भाजपा नेता बौद्धिक रूप से इतने दिवालिया हो गए हैं कि वे आधिकारिक निमंत्रण और अखबार के विज्ञापन के बीच अंतर नहीं कर सकते? या वे किसी भी कीमत पर जनता को गुमराह करने पर आमादा हैं?’’

उन्होंने विभाग की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा, ‘यहां उर्दू में कोई आधिकारिक निमंत्रण जारी नहीं किया गया था। पाठकों तक जानकारी पहुंचाने के लिए किसी विशेष समाचार पत्र की भाषा में विज्ञापन प्रकाशित करना एक नियमित प्रशासनिक अभ्यास है।’

मंत्री ने पिछली सरकारों का जिक्र करते हुए भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने पूछा, ‘जब बीएस येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई सत्ता में थे, तो क्या उर्दू अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित नहीं होते थे? आपके तर्क पर बात करें तो क्या इसका मतलब यह है कि उस समय उर्दू में विज्ञापन जारी करने वाले सभी भाजपा नेता ‘राष्ट्र-विरोधी’ थे।’’

मंत्री ने उर्दू में विज्ञापनों की एक श्रृंखला भी साझा की जिसे भाजपा ने राज्य में सत्ता में रहने के दौरान प्रकाशित कराया था।

भाषा शोभना पवनेश

पवनेश


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