कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में निर्णय सुरक्षित
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में निर्णय सुरक्षित
प्रयागराज, छह जून (भाषा) मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाद की पोषणीयता को चुनौती देते हुए नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के नियम 11 के आदेश सात के तहत शाही ईदगाह मस्जिद द्वारा दायर आवेदन पर अपना निर्णय बृहस्पतिवार को सुरक्षित रख लिया।
नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के नियम 11 का आदेश 7 यह व्यवस्था देता है कि यदि कोई वाद किसी कानून के तहत बाधित है तो वह पोषणीय (सुनवाई योग्य) नहीं है।
वाद की पोषणीयता के संबंध में मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की अदालत कर रही थी। यह वाद शाही ईदगाह मस्जिद के ढांचे को हटाकर कब्जा दिलाने और मंदिर का पुनर्निमाण कराने की मांग के साथ दायर किया गया है।
मुस्लिम पक्ष- शाही ईदगाह की प्रबंधन कमेटी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने उक्त नियम के तहत वाद की पोषणीयता को इस आधार पर चुनौती दी है कि ये वाद पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत बाधित हैं क्योंकि इस कानून में 15 अगस्त, 1947 को मौजूद किसी धार्मिक स्थल का चरित्र नहीं बदला जा सकता।
मुस्लिम पक्ष के मुताबिक, ये वाद स्वयं यह बात स्वीकारते हैं शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण 1669-70 में किया गया था।
हिंदू पक्ष द्वारा दायर मुकदमों में मथुरा में 13.37 एकड़ परिसर में कटरा केशव देव मंदिर से सटी शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की प्रार्थना की गई है। साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का कब्जा सौंपने और मौजूदा ढांचे को ध्वस्त करने की मांग की गई है।
इससे पूर्व, अदालत ने हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद 31 मई, 2024 को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, ईदगाह के वकील महमूद प्राचा द्वारा इस मामले में उनका पक्ष सुनने का अनुरोध करने के बाद इस मामले में फिर से सुनवाई हुई।
बृहस्पतिवार को ईदगाह की ओर से, महमूद प्राचा ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की ओर से तस्लीमा अजीज अहमदी द्वारा बहस पूरी की गई। उन्होंने दलील दी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अधिकार दिया जाए और आगे की सुनवाई की वीडियोग्राफी कराई जाए।
प्राचा ने यह दलील भी दी कि चूंकि यह मुकदमा वादी और प्रतिवादी के बीच का है, इसलिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अदालत किसी व्यक्ति या अधिवक्ता को न्याय मित्र नियुक्त करे।
इस पर अदालत ने कहा कि वाद की पोषणीयता पर आदेश सुनाए जाने के बाद इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल को इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है।
हिंदू पक्ष ने पूर्व में दलील दी थी कि सरकारी रिकार्ड में शाही ईदगाह के नाम पर कोई संपत्ति नहीं है और यह संपत्ति अवैध रूप से कब्जा की गई है।
भाषा राजेंद्र रंजन
रंजन

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