माओवादी हिंसा के पीड़ितों ने ‘दिमागी नक्सली होने पर गर्व’ वाले बयान को लेकर चिदंबरम की आलोचना की
माओवादी हिंसा के पीड़ितों ने ‘दिमागी नक्सली होने पर गर्व’ वाले बयान को लेकर चिदंबरम की आलोचना की
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) माओवादी हिंसा के कई पीड़ितों ने मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सल होने पर गर्व’ वाले बयान की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे बयान सिर्फ ‘फ़ॉलोअर्स बढ़ाने’ या ‘किसी तरह का एजेंडा’ आगे बढ़ाने के लिए नहीं दिए जाने चाहिए।
माओवादी हिंसा के शिकार रुद्रेश सिंह ने बस्तर शांति समिति की ओर से यहां आयोजित प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘पिछले कुछ सालों में नक्सली हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान गई है। नक्सली हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में अपने शरीर के अंग गंवा चुके बहुत से लोग किसी तरह अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। यह कोई मजाक नहीं है।’’
छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में नक्सल-विरोधी अभियान के दौरान माओवादियों की गोलीबारी और आईईडी धमाके में घायल हुए सुरक्षाकर्मियों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान सिंह भी शामिल थे।
उन्होंने कहा, ‘‘और इसी वजह से, आख़िरकार मुझे अपना एक पैर घुटने के नीचे से कटवाना पड़ा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली में वातानुकूलित कमरे में बैठकर यह कहना कि ‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है’, पूरी तरह से बेकार की बात है। सिर्फ फॉलोअर्स बढ़ाने या किसी तरह का एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए ऐसी बातें नहीं कही जानी चाहिए।’’
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके से यहां ‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया’ में प्रेसवार्ता करने आए नक्सली हिंसा के कई अन्य पीड़ितों ने भी चिदंबरम की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘हम उनकी टिप्पणी से बहुत आहत हैं।’’
चिदंबरम ने रविवार को ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और कहा, ‘‘मुझे ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।’’
उससे एक दिन पहले मोदी ने देश को तंत्र में अपनी पैठ बना चुके ‘दिमागी नक्सलियों’ को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि नीतियों में हेर-फेर करके समाज के लिए ये खतरा बने हुए हैं। मोदी ने नागरिकों से उन्हें ‘‘पहचानने और अलग-थलग करने’’ की अपील की थी।
प्रधानमंत्री ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से संबोधित करते कहा था कि देश जंगलों से सशस्त्र नक्सलवाद को खत्म करने में सफल रहा है, लेकिन इसके वैचारिक समर्थक हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के मौके तलाश रहे हैं।
बस्तर में नक्सली हिंसा के एक और पीड़ित सियाराम रामटेके ने चिदंबरम की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और उनके इरादों पर सवाल उठाए।
रामटेके ने कहा, ‘‘उन्होंने ऐसा क्यों कहा? हम यहां इसलिए आए हैं क्योंकि हम उनकी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं कर सके। जब एक पूर्व गृह मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता होते हुए वह ऐसा बयान दे रहे हैं, तो हमारे साथ कौन खड़ा होगा?’’
रामटेके ने कहा, ‘‘हम बाल-बाल बच गए हैं और किसी तरह जी रहे हैं। हम ‘दिमागी नक्सलियों’ से कहना चाहते हैं कि हमें उस रास्ते पर वापस नहीं जाना चाहिए। हमें शांति के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। बस्तर विकास चाहता है। सभी को इसका समर्थन करना चाहिए।’’
भाषा राजकुमार माधव
माधव

Facebook


