विजयन ने राज्यपाल पर विधानसभा संबोधन में अहम हिस्से छोड़ने का लगाया आरोप

विजयन ने राज्यपाल पर विधानसभा संबोधन में अहम हिस्से छोड़ने का लगाया आरोप

विजयन ने राज्यपाल पर विधानसभा संबोधन में अहम हिस्से छोड़ने का लगाया आरोप
Modified Date: January 20, 2026 / 02:46 pm IST
Published Date: January 20, 2026 2:46 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 20 जनवरी (भाषा) केरल विधानसभा में मंगलवार को तब एक अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हो गई, जब मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सदन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन समाप्त करने के तुरंत बाद आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण को पूरी तरह नहीं पढ़ा।

विजयन ने कहा कि छोड़े गए अंशों में भाजपा-शासित केंद्र सरकार की राजकोषीय नीति की आलोचना करने वाले हिस्से और राजभवन में लंबित विधेयकों से संबंधित संदर्भ शामिल थे।

मुख्यमंत्री विजयन के अनुसार, राज्यपाल ने दस्तावेज के 12वें पैरा का शुरुआती हिस्सा और 15वें पैरा के अंतिम हिस्से को नहीं पढ़ा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, 157 पैरा और 72 पृष्ठों वाले नीतिगत भाषण के 16वें पैरा में राज्यपाल द्वारा एक पंक्ति जोड़ी गई।

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विजयन ने सदन को बताया कि जिन अंशों को राज्यपाल ने नहीं पढ़ा, उनमें एक यह था— “इन सामाजिक और संस्थागत उपलब्धियों के बावजूद, केरल को केंद्र सरकार की एक के बाद एक प्रतिकूल कार्रवाइयों के कारण गंभीर राजकोषीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जो राजकोषीय संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करता है।”

उनके अनुसार, राज्यपाल द्वारा नहीं पढ़े गए अन्य अंश यह था— “राज्य सदन द्वारा पारित विधेयक लंबे समय तक लंबित रहे हैं। इन मुद्दों पर मेरी सरकार ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जिन्हें संविधान पीठ के पास भेजा गया है।”

अर्लेकर द्वारा किए गए जोड़ के संदर्भ में, विजयन ने कहा कि राज्यपाल ने पैराग्राफ 16 के दूसरे हिस्से में “मेरी सरकार मानती है” जोड़ दिया, जो इस प्रकार है –

“कर का बंटवारा और वित्त आयोग अनुदान राज्यों का संवैधानिक अधिकार है, यह कोई दान नहीं है। और इस जिम्मेदारी से जुड़े संवैधानिक निकायों पर किसी भी तरह का दबाव संघीय सिद्धांतों को कमजोर करता है।”

विजयन ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर नीतिगत संबोधन को ही आधिकारिक संस्करण के तौर पर स्वीकार किया जाए तथा राज्यपाल द्वारा उसमें जोड़े गए या छोड़ गए हिस्से का स्वीकार किये बिना।

इस पर विधानसभा अध्यक्ष ए. एन. शमसीर ने कहा कि सदन की पूर्व परंपराओं के अनुसार मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित संबोधन में कोई हिस्सा छोड़े जाने या कोई हिस्सा जोड़ने को आधिकारिक मान्यता नहीं दी जाती और इस बार भी वही रुख अपनाया जाएगा।

भाषा मनीषा अमित

अमित


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