अन्य मुस्लिम ओबीसी का क्या: पसमांदा के लिये आरक्षण की मांग वाली याचिका पर न्यायालय ने कहा

अन्य मुस्लिम ओबीसी का क्या: पसमांदा के लिये आरक्षण की मांग वाली याचिका पर न्यायालय ने कहा

अन्य मुस्लिम ओबीसी का क्या: पसमांदा के लिये आरक्षण की मांग वाली याचिका पर न्यायालय ने कहा
Modified Date: February 23, 2026 / 06:08 pm IST
Published Date: February 23, 2026 6:08 pm IST

नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने ‘पसमांदा मुसलमानों’ के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत नौकरियों और दाखिले में आरक्षण के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को मुसलमानों के बीच पिछड़े समुदायों का विवरण मांगा।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद वसीम सैफी का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश से पूछा, “अन्य मुस्लिम ओबीसी के बारे में क्या? ओबीसी होना केवल एक सामाजिक स्थिति का कारक नहीं है, बल्कि एक आर्थिक कारक भी है।”

इस जनहित याचिका में रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट की सिफारिश के अनुसार ओबीसी को उप-वर्गीकृत करके पसमांदा मुसलमानों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने का अनुरोध किया गया था।

पीठ ने कहा कि उसे इस बात पर विचार करना होगा कि क्या पसमांदा सांख्यिकीय रूप से एकमात्र पिछड़ा वर्ग हैं।

सीजेआई ने कहा, “अन्य गरीब मुसलमानों की कीमत पर, आप केवल पसमांदा को बढ़ावा देना चाहते हैं… कुल कितने मुसलमान पिछड़े हुए हैं, इस पर आपने कोई अध्ययन क्यों नहीं किया?”

वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश ने कहा कि वह सवालों के जवाब में एक नोट दाखिल करेंगी। इसके बाद पीठ ने याचिका को चार सप्ताह बाद दोबारा सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।

प्रकाश ने शुरुआत में ही पीठ से आग्रह किया कि वह जनहित याचिका को आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के तहत चार प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के मुद्दे से संबंधित एक अन्य लंबित मामले के साथ जोड़ दे।

वरिष्ठ वकील ने कहा कि ‘पसमांदा’ मुसलमान गरीब हैं और उन्हें ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण लाभ प्राप्त करने का अधिकार है।

भाषा प्रशांत माधव

माधव


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