चुनाव के दौरान ईडी विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों तेज कर देती है: सिब्बल ने पूछा

चुनाव के दौरान ईडी विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों तेज कर देती है: सिब्बल ने पूछा

चुनाव के दौरान ईडी विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों तेज कर देती है: सिब्बल ने पूछा
Modified Date: January 10, 2026 / 05:52 pm IST
Published Date: January 10, 2026 5:52 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने शनिवार को इस बात पर हैरानी जताई कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) विपक्षी नेताओं के खिलाफ केवल चुनाव के दौरान ही कार्रवाई क्यों करता है और उन्होंने उच्चतम न्यायालय से जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र के संबंध मे लंबित पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करने का अनुरोध किया।

सिब्बल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई के पीछे एकमात्र मकसद विपक्षी नेताओं को परेशान करना प्रतीत होता है और उन्होंने झारखंड में हेमंत सोरेन और बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के खिलाफ जांच एजेंसी की कार्रवाई के उदाहरण दिये।

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उन्होंने यह भी पूछा कि पश्चिम बंगाल में आई-पैक के खिलाफ छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय किस बात की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी सभी दस्तावेजों को अपने साथ नहीं ले जा सकती।

ईडी ने बृहस्पतिवार को कोयला तस्करी के एक मामले के सिलसिले में कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कार्यालय और उसके प्रमुख के आवास पर छापेमारी की थी।

छापेमारी के दौरान इसके अधिकारियों को बाधाओं का सामना करना पड़ा था। ईडी का दावा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी परिसर में दाखिल हुईं और जांच से संबंधित ‘‘महत्वपूर्ण’’ सबूत अपने साथ ले गईं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सिब्बल ने कहा कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने कभी भी झूठी जानकारी के आधार पर किसी राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया था। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच, जब संप्रग सत्ता में थी तब ईडी को कभी भी इतनी खुली छूट नहीं दी गई थी।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘जब प्रवर्तन निदेशालय का गठन हुआ था, तब हमें यह नहीं पता था कि यह एक सर्वव्यापी अभियोजन एजेंसी बन जाएगी जो देश में कहीं भी, कभी भी जा सकती है। यह संघीय ढांचे पर भी हमला कर सकती है, जैसे विपक्षी नेताओं को परेशान करना और उनकी सरकारों को गिराना, चाहे वह उचित हो या अनुचित।’’

पश्चिम बंगाल में हो रहे घटनाक्रम से दुखी होने का जिक्र करते हुए सिब्बल ने कहा, ‘‘मैं नहीं चाहता कि हमारे देश की एकता और अखंडता भंग हो।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकती है, तो उन्होंने कहा, ‘‘यदि कोई बिना किसी आधार के मनमाना फैसला लेता है, तो उसके भी नतीजे होंगे। यदि वे दो-तिहाई बहुमत से जीत रहे हैं, तो तीन-चौथाई बहुमत से भी जीत हासिल करेंगे।’’

राज्यसभा सदस्य ने उच्चतम न्यायालय से जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र के संबंध मे लंबित पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि जहां भी प्राथमिकी दर्ज होती है, ईडी वहां पहुंच जाती है, क्योंकि उसे लगता है कि उसे हर जगह जांच करने का अधिकार है।

सिब्बल ने कहा, ‘‘यह भी दिलचस्प है कि ईडी केवल वहीं कार्रवाई करती है जहां चुनाव होते हैं। झारखंड का मामला याद कीजिए, जहां चुनाव के दौरान ईडी पहुंची थी। बिहार में भी ऐसा ही हुआ, जब चुनाव के दौरान ईडी वहां पहुंची और अदालत ने ऐसी प्रक्रिया शुरू की कि लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को दिल्ली आना पड़ा और उनका चुनाव कार्यक्रम बाधित हो गया।’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘अब ईडी पश्चिम बंगाल पहुंच गई है क्योंकि वहां चुनाव होने हैं।’’

आई-पैक पर छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री द्वारा बाधा उत्पन्न करने संबंधी ईडी के आरोप के बारे में पूछे जाने पर, सिब्बल ने कहा, ‘‘ईडी को पहले यह बताना चाहिए कि वे किस बात की जांच कर रहे थे। अगर उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े दस्तावेज चाहिए थे, जैसा कि अखबारों में छपा है, तो उन्हें कंप्यूटर तक पहुंच की अनुमति मांगनी चाहिए थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्हें अचानक दस्तावेज इकट्ठा करने की याद आ गई। वे अशांति फैलाना चाहते हैं और उनका रवैया और इरादा स्पष्ट है – तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को कैसे परेशान किया जाये, क्योंकि वे (भाजपा) पश्चिम बंगाल में जीत नहीं सकते।’’

सिब्बल ने कहा, ‘‘ईडी सर्वव्यापी है, ईश्वर की तरह। ईडी इस सरकार का भगवान है और कुछ भी कर सकता है। सीबीआई भी वैसी ही है।’’

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश


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