नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि फरक्का (गंगा) जल संधि के संदर्भ में केंद्र सरकार बिहार की पेयजल और औद्योगिक जल जरूरतों सहित अन्य चिंताओं से अवगत है और उन्हें ध्यान में रखते हुए वह ‘‘उपयुक्त निर्णय’’ लेगी।
जयशंकर ने जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य संजय झा को लिखे पत्र में यह टिप्पणी की।
झा ने बीते मानसून सत्र के दौरान छह अगस्त को राज्यसभा में फरक्का जल संधि का विशेष उल्लेख करते हुए सरकार से आग्रह किया था कि फरक्का (गंगा) जल संधि के नवीनीकरण के दौरान बिहार के जल हितों की रक्षा की जाए।
विदेश मंत्री ने 28 अगस्त की तिथि वाले पत्र में कहा कि सरकार गंगा जल संधि से संबंधित झा की चिंताओं को पूरी तरह समझती है।
उन्होंने कहा कि जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में विभिन्न हितधारकों की भागीदारी के साथ अंतर-मंत्रालयी चर्चाएं हुईं, ताकि संधि के कार्यान्वयन और उसके भविष्य पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया जा सके।
जयशंकर ने कहा, ‘‘बिहार सरकार के एक अधिकृत प्रतिनिधि ने 22 अगस्त 2023, 30 अक्टूबर 2023, 15 मार्च 2024 और 31 मई 2024 को आयोजित इन चर्चाओं में हिस्सा लिया था।’’
उनका कहना था कि इन बैठकों के दौरान बिहार के पेयजल और औद्योगिक जल की आवश्यकताओं समेत हितधारकों के विचारों और जरूरतों पर विधिवत विचार किया गया।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार इन कारकों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त निर्णय लेगी।’’
जयशंकर ने अपने पत्र में उम्मीद जताई कि उपरोक्त जानकारी से झा की चिंताओं का पर्याप्त समाधान हो गया होगा।
झा ने जयशंकर के पत्र को ‘एक्स’ पर साझा करते हुए सकारात्मक उत्तर के लिए विदेश मंत्री का आभार जताया।
उन्होंने कहा, ‘‘बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के प्रतिनिधि ने उनके (झा) जल संसाधन मंत्री रहने के दौरान 22 अगस्त 2023 और 30 अक्टूबर 2023 को तथा बाद में 15 मार्च 2024 और 31 मई 2024 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित चर्चाओं में भाग लिया था।’’
उन्होंने कहा कि इन बैठकों में बिहार की पेयजल, कृषि और औद्योगिक जल जरूरतों पर विधिवत विचार किया गया था।
झा ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार द्वारा बिहार के हितों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिए जाने के स्पष्ट आश्वासन के लिए हम सभी बिहारवासी हृदय से आभारी हैं।’’
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से संबंधित फरक्का संधि 1996 में 30 वर्ष की अवधि के लिए हुई थी, जिसकी अवधि दिसंबर, 2026 में समाप्त हो रही है।
बिहार का तर्क है कि फरक्का बैराज की वजह से गंगा नदी में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई है, जिससे नदी का तल ऊंचा हो गया है। इससे मानसून के दौरान राज्य में गंभीर बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ जाता है। बैराज के प्रभाव से गर्मियों के महीनों में जल स्तर पर विपरीत असर पड़ता है, जिससे राज्य के कई इलाकों में पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।
भाषा हक हक मनीषा
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