महिला आरक्षण: रंजना कुमारी ने इसे जल्द लागू करने की मांग की
महिला आरक्षण: रंजना कुमारी ने इसे जल्द लागू करने की मांग की
नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) महिला अधिकार कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने मंगलवार को महिला आरक्षण कानून को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग करने पर जोर दिया। उन्होंने आगाह किया कि आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने से महिलाओं को न्याय मिलने में देरी हो सकती है।
कुमारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि यदि महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का इरादा है, तो इस कानून को परिसीमन या जनगणना जैसे ‘अलग राजनीतिक मुद्दों’ से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘परिसीमन एक अलग राजनीतिक प्रक्रिया है, उसका बहाना बनाकर महिलाओं के हक में देरी नहीं की जानी चाहिए।
रंजना ने तंज कसते हुए कहा कि पुरुषों के संसद जाने के लिए तो कभी जनगणना या परिसीमन जैसी शर्त नहीं रखी गई, फिर महिलाओं के लिए ही ऐसी रुकावटें क्यों पैदा की जा रही हैं?’
‘सेंटर फॉर सोशल रिसर्च’ (सीएसआर) की निदेशक ने लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि इससे पुरुष नेताओं की अपनी सीट खोने की चिंता कम होगी और अब इस कानून का विरोध नहीं होना चाहिए।
कानून को ‘चुनावी रणनीति’ बताने वाली आलोचनाओं पर कुमारी ने कहा कि राजनीतिक नफे-नुकसान की वजह से लैंगिक न्याय के बड़े लक्ष्य को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
कुमारी ने कहा कि यदि महिलाओं को न्याय देना किसी दल की चुनावी रणनीति है, तो इसमें कोई हर्ज नहीं है।
उन्होंने सवाल किया कि जिन्हें पहले मौका मिला उन्होंने कुछ क्यों नहीं किया और वे अब क्यों हिचक रहे हैं।
रंजना कुमारी ने राजनीतिक दलों से परिसीमन के नाम पर कानून को नहीं रोकने की अपील की।
उन्होंने पूछा, ‘देश की महिलाएं सभी दलों से पूछ रही हैं कि अगर अभी नहीं, तो फिर कब? और जो पहले समर्थन कर रहे थे, वे अब पीछे क्यों हट रहे हैं?’
रंजना कुमारी ने सभी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि वे इस कानून की राह में रोड़ा न अटकाएं।
उन्होंने जोर दिया कि यदि मंशा साफ है, तो राजनीतिक दलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अन्य मुद्दों का बहाना बनाकर इस कानून की राह न रोकी जाए।
महिला अधिकार कार्यकर्ता ने 33 प्रतिशत आरक्षण को अपर्याप्त बताते हुए 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की मांग की।
कुमारी ने कहा, ‘एक-तिहाई न्याय नहीं है। 50-50 प्रतिशत ही सही मायने में लैंगिक न्याय है।’
उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं की 50 प्रतिशत से अधिक भागीदारी का उदाहरण देते हुए कहा, ‘हम देश को दिखा देंगे कि महिलाएं बेहतर नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम हैं।’
इससे पहले एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देशभर के महिला संगठनों ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है, लेकिन वे इसके समयबद्ध कार्यान्वयन पर स्पष्ट आश्वासन चाहते हैं।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस बार कोई ‘अगर-मगर’ नहीं होना चाहिए और भारत की महिलाओं को दोबारा निराश नहीं किया जाना चाहिए।
सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है।
वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, इसे जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू किया जाना था, जिसे अब 2029 के चुनावों से प्रभावी बनाने के लिए सरकार कानून में संशोधन हेतु संसद की विशेष बैठकें बुला रही है।
इन संशोधनों के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
भाषा सुमित अविनाश
अविनाश

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