विरोध-प्रदर्शन के बाद यादवपुर विश्वविद्यालय के क्षतिग्रस्त प्रतीकों को ठीक करने का काम शुरू

विरोध-प्रदर्शन के बाद यादवपुर विश्वविद्यालय के क्षतिग्रस्त प्रतीकों को ठीक करने का काम शुरू

विरोध-प्रदर्शन के बाद यादवपुर विश्वविद्यालय के क्षतिग्रस्त प्रतीकों को ठीक करने का काम शुरू
Modified Date: August 21, 2026 / 06:40 pm IST
Published Date: August 21, 2026 6:40 pm IST

कोलकाता, 21 अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित यादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) प्रशासन ने प्रसिद्ध भारतीय कलाकार नंदलाल बोस द्वारा डिजाइन किए गए विश्वविद्यालय के दो आधिकारिक प्रतीकों को फिर से ठीक करने का काम शुक्रवार को शुरू कर दिया। परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ये दोनों प्रतीक क्षतिग्रस्त हो गए थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

वर्ष 1955 में नंदलाल बोस द्वारा डिजाइन किए गए इन प्रतीकों को विश्वविद्यालय की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इन प्रतीकों का उद्देश्य राष्ट्रवादी और देशभक्ति की भावनाओं को प्रतिबिंबित करना था। वर्ष 1955 में ही जेयू की स्थापना हुई थी।

गेट नंबर चार के एक तरफ लगा प्रतीक चिह्न तब पूरी तरह टूट गया, जब बृहस्पतिवार शाम प्रदर्शनकारियों ने बंद गेट पर चढ़ते समय उसे रौंद दिया। बाद में वह जमीन पर दो टुकड़ों में पड़ा मिला।

विश्वविद्यालय के अधिकारी ने कहा, ‘‘जोरदार वार और लात लगने के बाद यह प्रतीक पूरी तरह से दो हिस्सों में टूट गया था। इसका लोहे का फ़्रेम भी निकल गया था और बताया जाता है कि गेट के पास जमा लोगों की तरफ इसे फेंका गया था। इसे ठीक करके दोबारा लगाने की प्रक्रिया जारी है।’’

उन्होंने बताया कि ठीक करने का काम शुरू करने से पहले प्रतीक के दोनों टुकड़ों को साफ किया गया और उनपर जमी धूल हटाई गई। गेट नंबर चार के दूसरी तरफ स्थित दूसरे प्रतीक को भी नुकसान पहुंचा है। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारी उसके ऊपर खड़े हो गए थे।

अधिकारी ने बताया कि प्रतीक का हिस्सा कमल की पंखुड़ियां आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। विश्वविद्यालय के प्रतीकों में कमल की पंखुड़ियों से घिरी तीन लौ दिखाई गई हैं।

अधिकारी ने कहा, ‘‘ये तीन लौ बौद्धिक सोच, भावना और प्रज्वलित कल्पना तथा आत्मा के विकास का प्रतिनिधित्व करती हैं।’’

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में