कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों से विश्व के नेता प्रभावित हुए: मोदी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों से विश्व के नेता प्रभावित हुए: मोदी
नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की शक्ति का उपयोग दुनिया किस प्रकार करेगी, इस दिशा में यह शिखर सम्मेलन एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है।
मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में, लोगों से ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के प्रति सतर्क रहने का भी आग्रह किया और सभी से अपील की कि वे बैंकों द्वारा केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) के अनुरोधों का पालन करें क्योंकि यह किसी व्यक्ति के बैंक खाते की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल में दिल्ली में आयोजित ‘एआई समिट’ के दौरान देश ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जिसमें कई देशों के नेता, उद्योगपति, नवोन्मेषी और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े लोग एक साथ आए।
उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले समय में एआई की शक्ति का उपयोग दुनिया किस प्रकार करेगी, इस दिशा में यह समिट निर्णायक मोड़ साबित हुआ है।’’
मोदी ने शिखर सम्मेलन में कहा कि उन्होंने विश्व के नेताओं को कई चीजें प्रदर्शित कीं, खासकर दो चीजें जिनसे वे बहुत प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि पहला उत्पाद अमूल के बूथ पर था। इसमें बताया गया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जानवरों का इलाज करने में मदद पहुंचा रही है और कैसे 24 घंटे एआई सहायता की मदद से किसान अपनी डेयरी और जानवर का हिसाब रखते हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरा भारतीय संस्कृति से संबंधित उत्पाद था। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया भर के नेता ये देखकर हैरत में पड़ गए कि कैसे एआई की मदद से हम अपने प्राचीन ग्रंथों को, प्राचीन ज्ञान को, पांडुलिपियों को संरक्षित कर रहे हैं और आज की पीढ़ी के अनुरूप उन्हें ढाल रहे हैं।’’
मोदी ने कहा, ‘‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में विश्व के नेता एआई की इन अभूतपूर्व उपलब्धियों से प्रभावित हुए।’’
उन्होंने कहा कि इस शिखर सम्मेलन में दुनिया को एआई के क्षेत्र में भारत की अद्भुत क्षमताएं देखने को मिली हैं। इस दौरान भारत ने तीन ‘मेड इन इंडिया एआई मॉडल’ भी पेश किए। यह अपने आप में अब तक का सबसे बड़ा एआई समिट रहा है। इस शिखर सम्मेलन को लेकर युवाओं का जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। मैं सभी देशवासियों को इस शिखर सम्मेलन की सफलता की बधाई देता हूं।
‘डिजिटल अरेस्ट’ और डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कई वरिष्ठ नागरिक और निर्दोष लोग ऐसे वित्तीय अपराधों का शिकार बन चुके हैं, इसलिए सतर्क और सावधान रहना बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी जब आपको आपके बैंक से केवाईसी अपडेट या पुन: केवाईसी करवाने के संदेश आते हैं तो मन में सवाल उठता है – मैं तो पहले ही केवाईसी करा चुका हूं, तो फिर यह क्यों? मेरा आपसे आग्रह है, झुंझलाइए नहीं, ये आपके पैसे की सुरक्षा के लिए ही है।’’
मोदी ने कहा कि भारतीय मूल के कई खिलाड़ी अपने-अपने देशों का नाम रोशन कर रहे हैं और यह बात टी20 विश्व कप में साफ तौर पर दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘कनाडा की टीम में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या सबसे अधिक है। टीम के कप्तान दिलप्रीत बाजवा का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था। नवनीत धालीवाल चंडीगढ़ से हैं। इस सूची में हर्ष ठाकर और श्रेयस मोवा जैसे कई नाम शामिल हैं, जो कनाडा और भारत दोनों का गौरव बढ़ा रहे हैं। अमेरिका की टीम में कई चेहरे भारत के घरेलू क्रिकेट से निकले हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीयता की यही तो विशेषता है। भारतीय जहां भी जाते हैं अपनी मातृभूमि की जड़ों से जुड़े रहते हैं और अपनी कर्मभूमि यानि जिस देश में रहते हैं उसके विकास में भी सहयोग करते हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी के अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने गुलामी की मानसिकता से मुक्ति की बात कही थी। उन्होंने कहा कि आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में राष्ट्रपति भवन ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और कल यानि 23 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ मनाया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन के केन्द्रीय प्रांगण में सी. राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।
राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे।
मोदी ने विभिन्न परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों के लिए भी एक संदेश दिया।
छात्रों को ‘‘एग्जाम वॉरियर्स’ बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी योग्यता अंकों से निर्धारित नहीं होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हां, ऐसे समय में मन में थोड़ी शंका आना भी स्वाभाविक है। कभी लगता है, सब याद रहेगा या नहीं रहेगा। कभी लगता है, समय कम तो नहीं पड़ जाएगा न ! ये भाव हर पीढ़ी के बच्चों ने महसूस किए हैं, आप अकेले नहीं हैं। आप याद रखिए, आपकी अहमियत आपके अंक पत्र से तय नहीं होती। इसलिए खुद पर भरोसा रखिए। जो पढ़ा है, उसे पूरे मन से लिखिए। और जो नहीं आया, उस एक सवाल को अपने मन पर हावी मत होने दीजिए।’’
रेडियो कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को भी श्रद्धांजलि दी, जिनकी जयंती 24 फरवरी को है।
उन्होंने केरल की सदियों पुरानी मामंगम परंपरा का भी जिक्र किया, जिसे अक्सर केरल कुंभ कहा जाता है और जिसका आयोजन लगभग 250 वर्षों बाद हो रहा है।
भाषा सुरभि सुभाष
सुभाष

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