जुलाई में यमुना में मल-संबंधी ‘कॉलीफॉर्म’ के स्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई: डीपीसीसी

जुलाई में यमुना में मल-संबंधी ‘कॉलीफॉर्म' के स्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई: डीपीसीसी

जुलाई में यमुना में मल-संबंधी ‘कॉलीफॉर्म’ के स्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई: डीपीसीसी
Modified Date: August 5, 2026 / 07:22 pm IST
Published Date: August 5, 2026 7:22 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के जुलाई के यमुना जल गुणवत्ता संबंधी आंकड़े बताते हैं कि पिछले महीने की तुलना में नदी के कई स्थानों पर ‘‘फीकल (मल-संबंधी) कॉलीफॉर्म’’ का स्तर कम हुआ है, जो नदी में अशोधित मल-जल की मात्रा घटने का संकेतक है।

हालांकि, रिपोर्ट में जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का स्तर अब भी काफी अधिक दर्ज किया गया है। बीओडी पानी में मौजूद जैविक पदार्थों को तोड़ने के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा आवश्यक घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को दर्शाता है। बीओडी का स्तर अधिक होना पानी में प्रदूषण की अधिक मात्रा का संकेत है, अर्थात यदि बीओडी का स्तर अधिक होता है तो पानी में ऑक्सीजन की कमी होती है तथा जलीय जीवों को नुकसान पहुंचता है।

‘कॉलीफॉर्म’ जीवाणुओं का एक बड़ा समूह है, जो मनुष्य और गर्म रक्त वाले पशुओं की आंतों, मिट्टी और पौधों पर पाए जाते हैं। पानी में इनकी उपस्थिति मल के कारण जल के प्रदूषित होने और इसमें अन्य खतरनाक रोगाणुओं के होने का संकेत देती है।

डीपीसीसी द्वारा यमुना जल गुणवत्ता की जांच के तहत राजधानी में नदी के प्रवाह क्षेत्र के कम से कम सात स्थानों से पानी के नमूने लिये गए। इन नमूनों में बीओडी, घुलित ऑक्सीजन, रासायनिक ऑक्सीजन मांग, पीएच और ‘फीकल कॉलीफॉर्म’ जैसे कई मानकों की जांच की जाती है, ताकि प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जा सके।

इन स्थानों में पल्ला, वजीराबाद, आईएसबीटी पुल, आईटीओ पुल, निजामुद्दीन पुल, ओखला बांध और हरियाणा के किडवाली स्थित असगरपुर शामिल हैं।

जून माह की तुलना में इन सभी स्थानों में से केवल एक स्थान पर ‘फीकल कॉलीफॉर्म’ के स्तर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि चार स्थानों पर काफी सुधार देखा गया। वहीं, दो स्थानों पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ।

हालांकि, फीकल कॉलीफॉर्म का स्तर अब भी 2,500 की निर्धारित सीमा और 500 के वांछित स्तर से काफी अधिक रहा।

जून की रिपोर्ट की तुलना में निजामुद्दीन पुल पर ‘फीकल कॉलीफॉर्म’ का स्तर 1,30,000 ‘मोस्ट प्रोबेबल नंबर’ प्रति 100 मिलीलीटर (अर्थात एमपीएन/100 मिली) रहा, जबकि जून में यह 1,20,000 एमपीएन/100 मिली दर्ज किया गया था।

वहीं, असगरपुर में नदी में सुधार देखा गया, जहां जुलाई में ‘फीकल कॉलीफॉर्म’ का स्तर 3,20,000 एमपीएन/100 मिलीलीटर रहा, जो जून के 3,90,000 से बेहतर है।

‘फीकल कॉलीफॉर्म’ के स्तर में सुधार दिखाने वाले अन्य तीन स्थानों में पल्ला, वज़ीराबाद, आईटीओ पुल भी शामिल है।

इसके अलावा ओखला बांध और आईएसबीटी पुल के पास कॉलीफॉर्म का स्तर जून माह के आंकड़े के समान रहा। ओखला बांध पर यह 1,10,000 एमपीएन/100 मिली रहा, वहीं आईएसबीटी पुल पर 1,70,000 एमपीएन/100 मिली रहा।

भाषा प्रचेता सुरेश

सुरेश


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