Tamil Nadu New Govt Formation: विजय को रोकने नई सियासी चाल! ये दो धुर-विरोधी दल आ सकते हैं एक साथ, गठबंधन की अटकलों से गर्म हुई सियासी फिज़ा

विजय को रोकने नई सियासी चाल! ये दो धुर-विरोधी दल आ सकते हैं एक साथ, Tamil Nadu New Govt Formation

Tamil Nadu New Govt Formation: विजय को रोकने नई सियासी चाल! ये दो धुर-विरोधी दल आ सकते हैं एक साथ, गठबंधन की अटकलों से गर्म हुई सियासी फिज़ा
Modified Date: May 6, 2026 / 10:25 pm IST
Published Date: May 6, 2026 10:25 pm IST

चेन्नईः Tamil Nadu New Govt Formation: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की राजनीति में अप्रत्याशित मोड़ लेते हुए डीएमके और एआईएडीएमके जैसी धुर विरोधी पार्टियों के संभावित गठबंधन की अटकलों ने माहौल और गरमा दिया है। इस बीच, टीवीके प्रमुख विजय ने लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने 112 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा, लेकिन राज्यपाल ने बहुमत के लिए आवश्यक 118 विधायकों का समर्थन पत्र प्रस्तुत करने को कहा। इस पर विजय ने अतिरिक्त समय की मांग की है।

Tamil Nadu New Govt Formation: वहीं, विकास चंद्र कुट्टम (वीसीके), जिसने चुनाव डीएमके के साथ मिलकर लड़ा था, उसके रुख पर भी नजरें टिकी हुई थीं। कयास लगाए जा रहे थे कि वीसीके, टीवीके को समर्थन दे सकती है, लेकिन डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन की अटकलों के बीच वीसीके ने अपनी प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी है। इधर, एआईएडीएमके ने टीवीके को समर्थन देने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि इस तरह की सभी अटकलें निराधार हैं। इससे पहले वामपंथी दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया था, जिससे विजय की राह और मुश्किल हो गई है।

संख्याबल की बात करें तो 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर है। विजय के दो सीटों से जीतने के कारण एक सीट छोड़ने पर यह संख्या 107 रह जाएगी। डीएमके के पास 59 और एआईएडीएमके के पास 47 सीटें हैं। यदि दोनों दल साथ आते हैं तो उनका आंकड़ा 106 तक पहुंचता है, जो बहुमत से 12 सीट कम है। सूत्रों के अनुसार, विजय के 7 मई को शपथ लेने की संभावना जताई जा रही थी और उन्हें कांग्रेस का समर्थन भी मिला है, लेकिन पर्याप्त संख्याबल नहीं होने के कारण शपथ ग्रहण टल सकता है।

गौरतलब है कि एआईएडीएमके की स्थापना 1972 में एम.जी. रामचंद्रन ने डीएमके से अलग होकर की थी। तब से दोनों दलों के बीच कड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। ऐसे में यदि इन दोनों के बीच गठबंधन होता है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें राजनीतिक दलों की आगामी रणनीति और राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हैं, जो प्रदेश में सरकार गठन की दिशा तय करेंगे।

 


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।