AIMIM in West Bengal Election: बिहार में जीत से उत्साहित बंगाल पहुंचे थे AIMIM चीफ ओवैसी.. हर सीट पर हो सकती है जमानत जब्त, जानें कितने उम्मीदवार उतारे थे मैदान में

AIMIM in West Bengal Election: बंगाल चुनाव 2026 में AIMIM को बड़ा झटका, ओवैसी की पार्टी 0.19% वोट शेयर पर सिमटी

AIMIM in West Bengal Election: बिहार में जीत से उत्साहित बंगाल पहुंचे थे AIMIM चीफ ओवैसी.. हर सीट पर हो सकती है जमानत जब्त, जानें कितने उम्मीदवार उतारे थे मैदान में

AIMIM in West Bengal Election || Image- Deccan Chronicle FILE

Modified Date: May 4, 2026 / 04:23 pm IST
Published Date: May 4, 2026 4:23 pm IST
HIGHLIGHTS
  • AIMIM को बंगाल चुनाव में एक भी सीट पर बढ़त नहीं
  • पार्टी का वोट शेयर केवल 0.19 प्रतिशत रहा
  • अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने की स्थिति

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को करारा झटका लगा है। (AIMIM in West Bengal Election) मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में 12 उम्मीदवार उतारने के बावजूद पार्टी दोपहर तक एक भी सीट पर बढ़त बनाने में विफल रही।

AIMIM की अधिकाँश सीटों पर जमानत जब्त

चुनाव आयोग द्वारा दोपहर दो बजे तक जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एआईएमआईएम का राज्यव्यापी वोट प्रतिशत महज 0.19 प्रतिशत पर सिमट गया है। ओवैसी की पार्टी ने मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम आबादी वाले जिलों में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने की स्थिति बन गई है।

विशिष्ट सीटों के आंकड़ों पर गौर करें तो मालदा जिले की मोथाबाड़ी सीट पर एआईएमआईएम उम्मीदवार को केवल 995 वोट मिले हैं, जबकि सुजापुर में यह आंकड़ा 2500 तक ही पहुंच पाया। (AIMIM in West Bengal Election) मुर्शिदाबाद की सूती सीट पर पार्टी को 741 और रघुनाथगंज में 1400 मत प्राप्त हुए हैं। हालांकि, कांडी विधानसभा सीट पर पार्टी के पक्ष में 11,000 से अधिक वोट पड़े हैं, जिसके साथ वह दूसरे स्थान पर बनी हुई है।

मतदाताओं ने नकारा, नहीं मिला बिहार जैसा समर्थन

बिहार विधानसभा चुनाव के पिछले प्रदर्शन से उत्साहित होकर एआईएमआईएम ने बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े राजनीतिक प्रभाव की उम्मीद की थी। पार्टी के स्थानीय नेतृत्व का मानना था कि बिहार के ‘सीमांचल’ क्षेत्र से भौगोलिक निकटता के कारण बंगाल के इन जिलों में उन्हें वैसा ही समर्थन मिलेगा, लेकिन मतदाताओं ने इस रणनीति को नकार दिया।

निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ गठबंधन टूटना ओवैसी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। गठबंधन खत्म होने के बाद एआईएमआईएम ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिसका असर अब परिणामों में साफ दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, पूर्व सहयोगी हुमायूं कबीर अपनी दोनों सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।

SIR को बनाया था सबसे बड़ा मुद्दा

मतदान से पहले मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर भी विवाद रहा था। (AIMIM in West Bengal Election) एआईएमआईएम ने इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उत्तर 24 परगना के हाबरा, बारासात और बशीरहाट दक्षिण के साथ-साथ आसनसोल उत्तरी और करनदिघी में भी प्रत्याशी उतारे थे।

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