18 नवम्बर 1901 को महाराष्ट्र कोल्हापुर में जन्मे वी शांताराम को बचपन से ही फिल्मो के तरफ ज्यादा रुझान था। 1921 में मूक फिल्म सुरेख हरण से फ़िल्मी करियर की शुरुवात करने वाले वी शांताराम ने अनेक सुपर डुपर फिल्मे की जिनमे नवरंग, दो आंखें बारह हाथ, डॉ कोटनिस की अमर कहानी जैसी फिल्मे हैं आज वी शांताराम का जन्म दिन है इस अवसर पर गूगल ने डूडल के माध्यम से श्रद्धांजलि दी है. वी शांताराम ने लगभग 50 साल बॉलिवुड को दिए जिसमें उन्होंने सामाजिक चेतनाओं को लेकर फिल्में बनाईं।वी शांताराम फिल्म की हर विधा में पारंगत थे. वे न सिर्फ अच्छे निर्देशक थे बल्कि संपादन और अदाकारी की विधा में माहिर थे। सन 1957 में आई दो आंखें बारह हाथ फिल्म उनकी सबसे उम्दा फिल्मों में जानी जाती है। इस फिल्म का हर पक्ष मजबूत था. संगीत, अदाकारी, चुस्त निर्देशन और संपादन। वंसत देसाई का संगीत आज भी लोगों के मन में हिलोरे भर देता है। ऐ मालिक तेरे बंदे हम 6 दशक बाद भी तरोताजा लगता है.शांताराम ने 1929 में प्रभात कम्पनी फिल्म की स्थापना के बाद अनेक फिल्मे उस बैनर तले की। 1937 में संत तुकाराम फिल्म आई जो सुपरहिट और वे रातो रात स्टार बन गए। भारतीय सिनेमा जगत की ये पहली फिल्म थी जिसे मशहूर वेनिस फिल्म फ्रेस्टिवल में सम्मानित किया गया। उसके बाद 1943 में आई उनकी फिल्म शकुंतला ने खिड़की तोड़ सफलता हासिल कर 104 हफ्ते चलने का रिकॉर्ड बनाया।
अपनी आंखें तक गंवा दीं
वी शांताराम अपने काम के इतने पक्के थे कि फिल्म सीन को रियल बनाने के लिए कुछ भी कर जाते थे. दो आंखें बारह हाथ के एक दृश्य में उन्हें एक सांड से लडऩा था। इसके लिए उन्होंने किसी डुप्लीकेट का सहारा नहीं लिया। बल्कि खुद ही सांड से भीड़ गए। इसका परिणाम यह हुआ कि सांड ने उन्हें घायल कर दिया। उनकी आंखों की रोशनी भी चली गई। दो साल फिल्मों से दूर रहने के बाद उन्होंने नवरंग का निर्माण किया। वे अपनी फिल्मे राजकमल कला मंदिर के बैनर तले बनाते थे.वी शांताराम को प्रतिष्ठित दादा साहेब फालके और पद्मविभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।नवरंग, दो आंखें बारह हाथ, डॉ कोटनिस की अमर कहानी जैसी फिल्मे बनाने वाले वी शांताराम को गूगल ने डूडल के माध्यम से श्रद्धांजलि दी है।
वी शांताराम ने लगभग 50 साल बॉलिवुड को दिए जिसमें उन्होंने सामाजिक चेतनाओं को लेकर फिल्में बनाईं।30 अक्टूबर 1990 को वी शांताराम ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।