Ganga Mai ki Betiyan 19th June 2026/Image Credit: ScreenGrab / Youtube / @TellyChakkar
Ganga Mai ki Betiyan: ‘ZEE TV’ के सबसे पसंदीदा शो ‘गंगा माई की बेटियां‘ में सिद्धू द्वारा रखवाई गई सत्यनारायण की पूजा से ठाकुर परिवार में कुछ सकारात्मकता आती हुई नज़र आ ही रही थी, लेकिन तभी एक पुराना पारिवारिक राज़ उनके लिए नई समस्या बन जाता है।
एपिसोड की शुरुआत स्नेहा और सिद्धू की पूजा से होती है, जहां स्नेहा और सिद्धू आपसी मतभेदों को भुलाकर, बतौर पति-पत्नी के रूप में एक साथ बैठते हैं। किन्तु, तभी स्नेहा एक ऐसा कदम उठाती है जो दुर्गावती के गुस्से को बड़का देता है। स्नेहा, बेझिझक शेखर को भी पूजा में आने के लिए आमंत्रित करती है यह सोचते हुए कि इसमें कोई बुराई नहीं है।
घर में शेखर को देखते ही, दुर्गावती दंग रह जाती है और वह तुरंत उसके आने की वजह पूछती है। जैसे ही स्नेहा शांत आवाज़ में कहती है कि शेखर को उसने बुलाया है, तो दुर्गावती का पारा सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। वह तुरंत स्नेहा को टोकती है और याद दिलाती है कि इस घर के कार्यक्रमों में कौन शामिल होगा और कौन नहीं, यह फैसला करने का अधिकार स्नेहा के पास नहीं है..
मेहमानों के सामने कोई तमाशा न हो, इसलिए दुर्गावती अपने गुस्से को दबाकर स्नेहा को अकेले में ले जाती है। इसके बाद जो हक़ीक़त उजागर होती है, हाल ही के एपिसोड में वह सबसे बड़े और चौंकाने वाले खुलासों में से एक बन जाती है।
दुर्गावती, स्नेहा पर बरसते हुए कहती है कि वह ठाकुर परिवार के पुराने ज़ख्मों की गहराई को कभी नहीं समझ सकती। फिर वह मधु के अतीत का एक दिल दहला देने वाला सच बताती है कि कैसे विमला के ज़ुल्मों और दबाव के चलते प्रेग्नेंट मधु को गर्भपात करवाना पड़ा। वह मधु की तकलीफ के लिए शेखर को ज़िम्मेदार ठहराते हुए स्नेहा से कहती है कि वह अपनी आँखें मूंद कर उन्ही गुनहगारों का साथ दे रही है जिसने ठाकुर परिवार को बहुत ज्यादा तकलीफ दी।
यह सुनकर स्नेहा पूरी तरह से सन्न रह जाती है। अब तक, वह मधु और शेखर की जुदाई को महज़ एक दुखद दास्तान मान रही थी, किन्तु इस खुलासे ने पूरी कहानी ही पलट दी, अब अतीत के पन्नो में दफ़्न असल हक़ीक़त पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं कि अतीत में असल में हुआ क्या था?
कहानी का यह नया मोड़, अब खुद स्नेहा के लिए एक चक्रव्यूह बन चूका है, जो स्नेहा कल तक मधु और शेखर को मिलाने की ज़िद पर अड़ी थी, आज दुर्गावती का पक्ष सुनने के बाद, उसका नज़रिया बदल सकता है, और हो सकता है कि अब उसे उन सभी बातों पर शक होने लगे, जिन पर वह अब तक आँख बंद करके भरोसा कर रही थी।
इसके साथ ही, अब यह गहरा राज़ दुर्गावती और स्नेहा के बीच की जंग में एक और हथियार बन सकता है। क्या स्नेहा, दुर्गावती के इन संगीन आरोपों पर भरोसा कर लेगी? या फिर अतीत के पन्नो में कुछ ऐसा सच छिपा है जो अब तक सामने ही नहीं आया है?