Ram Gopal Verma on Seedance 2.0 AI Video : बॉलीवुड-हॉलीवुड का ‘दी एंड’? राम गोपाल वर्मा ने बताया कैसे AI की सुनामी में बह जाएंगे सालों के करियर
Ram Gopal Varma ने कहा है कि Seedance 2.0 जैसे AI टूल्स फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। उनका मानना है कि फिल्मों की लागत और निर्माण समय में भारी गिरावट आने वाली है, जिससे पारंपरिक फिल्म निर्माण मॉडल प्रभावित होगा। उन्होंने इसे सिनेमा में एक नई तकनीकी क्रांति बताया है।
Ram Gopal Verma on Seedance 2.0 AI Video / Image source : X
- राम गोपाल वर्मा ने AI को फिल्म इंडस्ट्री के लिए ‘सुनामी’ बताया।
- उनका दावा—AI से फिल्मों की लागत और समय लगभग शून्य हो सकता है।
- भविष्य में ‘प्रॉम्टर’ की ताकत बड़े स्टार और डायरेक्टर से ज्यादा हो सकती है।
एंटरटेनमेंट डेस्क : Ram Gopal Verma on Seedance 2.0 AI Video मशहूर डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने भविष्य की एक डरावनी लेकिन हकीकत से भरी तस्वीर पेश की है। उनका कहना है कि ‘Seedance 2.0’ जैसे AI टूल्स के खिलाफ फिल्म इंडस्ट्री का गुस्सा सिर्फ एक ‘नी-जर्क रिएक्शन’ (तत्काल प्रतिक्रिया) है। जैसे ही शोर थमेगा, मेकर्स को उस कड़वे सच का सामना करना पड़ेगा जो हजारों करोड़ के साम्राज्य को ढहाने वाला है। टॉम क्रूज बनाम ब्रैड पिट की फर्जी लड़ाई या बाहुबली जैसे युद्ध के दृश्य जो मिनटों में AI द्वारा बनाए जा रहे हैं, उन्होंने साबित कर दिया है कि सालों की मेहनत और करोड़ों का खर्च अब बीते जमाने की बात होने वाली है।
असली खतरा कॉपीराइट नहीं, बल्कि समय और पैसा है
RGV के अनुसार, असली भूकंप यह अहसास है कि अब फिल्मों की लागत और समय लगभग जीरो होने वाला है। Ram Gopal Verma on Seedance 2.0 AI Video आज एक बॉलीवुड या हॉलीवुड फिल्म के लिए बड़े सेट्स, हजारों VFX शॉट्स और 300 से 1500 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। लेकिन अगर AI सिर्फ एक ‘प्रॉम्ट’ से थिएटर क्वालिटी के विजुअल बना सकता है, तो कोई इन्वेस्टर करोड़ों रुपये क्यों लगाएगा? जब AI मॉडल थिएटर रेजोल्यूशन और पूरी फिल्म बनाने की क्षमता हासिल कर लेंगे (जो कुछ ही महीनों की बात है), तो पुराने तरीके से फिल्में बनाना ‘प्रागैतिहासिक’ (Pre-historic) हो जाएगा।
क्रिएटिव क्लास की छुट्टी
वर्मा ने इसकी तुलना औद्योगिक क्रांति से की है, जहाँ मशीनों ने शारीरिक मेहनत को बेकार कर दिया था। अब AI वही काम ‘क्रिएटिव क्लास’ के साथ कर रहा है। सालों का अनुभव, विजन और यूनियन से सुरक्षित ‘क्रिएटिव दिमाग’ अब अप्रासंगिक होने वाले हैं। अब असली ताकत किसी फिल्म स्टार या बड़े डायरेक्टर के पास नहीं, बल्कि ‘प्रॉम्टर’ के पास होगी। वह प्रॉम्टर कोई भी हो सकता है—18 साल का छात्र, बेडरूम में बैठा कोई गेमिंग किड या छोटे शहर का कोई आम लड़का।
सुनामी आने वाली है और अब केवल बेहतरीन फिल्में ही बचेंगी
RGV कहते हैं कि यह सिनेमा का अंत नहीं है, बल्कि उस सिनेमा का अंत है जो सिर्फ अमीरों और खास लोगों की जागीर था। यह ‘सच्चे लोकतंत्र’ का जन्म है। एक 19 साल का लड़का, जिसके पास मुंबई आने तक के पैसे नहीं हैं, वह अपनी पॉकेट मनी से ऐसी फिल्म बना सकेगा जो पिछले दशक की 90% फिल्मों से बेहतर दिखेगी। उद्योग पहले भी डिजिटल कैमरा और VFX के आने पर चिल्लाया था, लेकिन तकनीक नहीं रुकी। अब चुनौती यह नहीं होगी कि फिल्म ‘कैसे’ बनाई जाए, बल्कि ‘क्या’ बनाया जाए। सुनामी आने वाली है, और केवल बेहतरीन फिल्में ही बचेंगी।
The film industry’s strong reaction against Seedance 2.0 regarding “copyright infringements” and also the threat to the very existence of the film industry is just a knee jerk reaction and once they get over that , they will stare at the much bigger picture
A bunch of viral…
— Ram Gopal Varma (@RGVzoomin) February 27, 2026
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