IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026: ट्रक चालक की बेटी ने किया कमाल, सीजी बोर्ड की प्रवीण्य सूची में हासिल किया आठवां स्थान, IBC24 ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से किया सम्मानित, आईएएस बनकर करना चाहती है समाज सेवा

IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026: ट्रक चालक की बेटी ने किया कमाल, सीजी बोर्ड की प्रवीण्य सूची में हासिल किया आठवां स्थान, IBC24 ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से किया सम्मानित, आईएएस बनकर करना चाहती है समाज सेवा

IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026: ट्रक चालक की बेटी ने किया कमाल, सीजी बोर्ड की प्रवीण्य सूची में हासिल किया आठवां स्थान, IBC24 ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से किया सम्मानित, आईएएस बनकर करना चाहती है समाज सेवा
Modified Date: August 19, 2026 / 07:50 pm IST
Published Date: August 19, 2026 7:50 pm IST

रायगढ़। IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026: यदि एक आदमी शिक्षित होता है तो केवल एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन जब एक बेटी शिक्षित होती है तो पूरी पीढ़ी शिक्षित होती है। कुछ इन्हीं भावों और विचारों के साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का नंबर वन न्यूज चैनल IBC24 हर वर्ष बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ठ अंक अर्जित करने वाली बेटियों को स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप प्रदान करता है। स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप (IBC24 Swarna Sharda Scholarship 2026) केवल एक स्कॉलरशिप ही नहीं हैं, बल्कि यह उन बेटियों के भविष्य के लिए अंशदान है, जो समाज और अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बने हैं। इस बार भी छत्तीसगढ़ की 12वीं की बोर्ड परीक्षा में स्टेट टॉपर बेटी को 1 लाख रुपए, उनके स्कूल को 1 लाख रुपए और जिले में प्रथम आने वाली बेटियों को 50-50 हजार रुपए प्रदान किया गया। सम्मान पाने वालों में रायगढ़ जिले के नंदेली की शीतल साहू भी शामिल है।

रायगढ़ जिले के ग्राम नंदेली की रहने वाली शीतल साहू ने सीजी 12वीं बोर्ड की परीक्षा में 96.8 प्रतिशत अंकों के साथ जिले में बेटियों के बीच पहला स्थान हासिल किया है। शीतल प्रदेश में सीजी बोर्ड की प्रवीण्य सूची में आठवें पायदान पर है। शीतल आईएएस बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं।

पिता पेशे से है ट्रक चालक

रायगढ़ जिले का छोटा सा गांव नंदेली। जहां एक गरीब परिवार की बेटी शीतल साहू ने 12वीं बोर्ड की परीक्षा में चमकीली सफलता हासिल की है। शीतल साहू नंदेली के महेंद्र सिंह पटेल मेमोरियल आदर्श विद्यालय में पढ़ाई करती है। शीतल की मां हाउसवाइफ है जबकि पिता पेशे से ट्रक चालक हैं। शीतल के पिता कई कई बार चार से पांच दिनों तक के लिए बाहर रहते हैं। शीतल अपनी मां के साथ नाना नानी के घर रहकर पढ़ाई करती है।

फिजिक्स और केमिस्ट्री में 99 मिले मार्क्स

शीतल बताती है कि उसने 12वीं की पढ़ाई के दौरान किसी भी तरह का कोई ट्यूशन या कोचिंग नहीं ली। जहां भी उसे डाउट होता था वह शिक्षकों से सॉल्व करवाती थी। रोजाना 7 से 8 घंटे की पढ़ाई के बाद शीतल को यह सफलता मिली है। शीतल को फिजिक्स और केमिस्ट्री में 99 मार्क्स मिले हैं। शीतल का कहना है कि उसे उम्मीद थी कि इससे भी अच्छे मार्क्स आएंगे। वह बताती है कि उसने आईबीसी 24 स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप के बारे में सुना था। उसे इस बात की खुशी है कि इस बार यह स्कॉलरशिप उसे मिलने वाली है। स्कॉलरशिप के इस पैसे से वह आगे की पढ़ाई कर सकेगी।

नाना नानी के घर रहकर पढ़ाई करती थी शीतल

शीतल का परिवार बेहद छोटे से घर में रहता है। उनके घर से लगा नाना नानी का घर है जहां पर रहकर वह पढ़ाई करती थी। शीतल की मां शांति साहू बताती हैं कि उसे राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना लाभ मिल रहा है। योजना के तहत हर महीने ₹1000 उसके खाते में आते हैं। इस राशि से घर की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिल जाती है। उसने पीएम आवास के लिए भी आवेदन किया हुआ है, हालांकि अब तक पीएम आवास नहीं मिल पाया है वह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आवास चाहती हैं।

चना मुरमुरा बेचकर घर चलाते हैं शीतल के नाना

शीतल के नाना भी चना मुरमुरा बेचकर घर चलाते हैं। उनका कहना है कि पीएम आवास योजना के तहत उन्हें डेढ़ लाख की सहायता मिली थी जिसे उन्होंने छोटा सा घर बनाया है। उन्हें इस बात की खुशी है कि IBC24 स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप के लिए शीतल का चयन हुआ है। इससे शीतल आगे की पढ़ाई कर सकेगी। यह राशि परिवार के लिए बेहद मददगार साबित होगी। वे कहते हैं की बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए स्वर्ण सदा स्कॉलरशिप योजना बेहद कारगर है।

2015 से दी जा रही है यह स्कॉलरशिप

बता दें कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का नंबर वन न्यूज चैनल 2015 से ही यह स्कॉलरशिप प्रदान कर रहा है। IBC24 अपने स्थापना के समय से ही बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रहा है। स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप हमारे इस मुहिम की एक बानगी है। इसके जरिए हम बेटियों को उड़ान भरने के लिए आसमान देते हैं, जिससे वह समाज बीच बेटियों के लिए पनपी गलत धारणाओं को दूर कर सकें।


लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.