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Alimony Law Changes High Court: ‘भरण पोषण के लिए पति की आय और खर्च का हो आंकलन…सरकारी नौकरी वाली पत्नी को गुजारा भत्ता पाने का हक नहीं’ हाईकोर्ट का अहम फैसला

Alimony Law Changes High Court: ‘भरण पोषण के लिए पति की आय और खर्च का हो आंकलन…सरकारी नौकरी वाली पत्नी को गुजारा भत्ता पाने का हक नहीं’ हाईकोर्ट का अहम …

Alimony Law Changes High Court: 'भरण पोषण के लिए पति की आय और खर्च का हो आंकलन...सरकारी नौकरी वाली पत्नी को गुजारा भत्ता पाने का हक नहीं' हाईकोर्ट का अहम फैसला / Image; AI Generated

Alimony Law Changes High Court: 'भरण पोषण के लिए पति की आय और खर्च का हो आंकलन...सरकारी नौकरी वाली पत्नी को गुजारा भत्ता पाने का हक नहीं' हाईकोर्ट का अहम फैसला / Image; AI Generated

Deepak Dilliwar
Published: 29 Jul 2026 | 1:18 pmModified: 29 Jul 2026 | 1:19 pm
HIGHLIGHTS
  1. मेंटेनेंस (भरण-पोषण) की राशि तय करने से पहले पति की आय और खर्च का आंकलन हो
  2. अनुमान के आधार पर मेंटेनेंस तय नहीं किया जा सकता
  3. सरकारी कर्मचारी पत्नी अंतरिम गुजारा भत्ता की हकदार नहीं

जबलपुर: Alimony Law Changes High Court भारत में घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, रोजाना कोर्ट में लाखों नए केस दर्ज हो रहे हैं। वहीं, कोर्ट में कुछ महिलाएं अपने पति के खिलाफ झूठे भी मुकदमे भी दायर कर रहीं हैं, ​जो अब मुसीबत बनते जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो दो से तीन शादियां कर रहीं हैं और पति से तलाक लेकर तीनों से भरण पोषण ले रहीं हैं। लेकिन अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भरण पोषण के मामले को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि मेंटेनेंस की राशि तय करने से पहले पति की आय का भी आंकलन किया जाए। यानि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पति की इनकम और खर्च को ध्यान में रखते हुए पत्नी को दिए जाने वाले गुजारा भत्ता की राशि को तय करें, ताकि बेवजह पति पर बोझ ना पड़े।

पति की आय के आंकलन के बाद तय हो भरण पोषण की राशि: हाईकोर्ट

Alimony Law Changes High Court दरअसल पति से भरण पोषण की मांग को लेकर एक महिला ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि मेंटेनेंस की राशि तय करने से पहले पति की आय का आंकलन होना चाहिए। मेंटेनेंस की राशि तय करने से पहले पति की वास्तविक कमाई की जांच, साथ ही पति की आय, खर्च, कर्ज़ और उस पर आश्रित लोगों का भी रिकॉर्ड लिया जाना चाहिए। वहीं, कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि अगर वास्तविक जांच नहीं किया गया है तो फैमिली कोर्ट का मेंटनेंस का आदेश नहीं माना जाएगा।

सरकारी नौकरी वाली पत्नी गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं: ग्वालियर खंडपीठ

इससे पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी थी। अदालत ने कहा कि यदि पत्नी सरकारी नौकरी में है और उसकी आय स्वयं के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त है, तो वह पति से अंतरिम गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी। हालांकि, मां के कमाने भर से पिता अपनी नाबालिग संतान के पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने ग्वालियर फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पति और पत्नी, दोनों की पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दी।

पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य जरूरतमंद पक्ष को मुकदमे की अवधि में आर्थिक सहारा देना है। फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की आय और देनदारियों का सही मूल्यांकन किया है। इसलिए उसके आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और निचली अदालत को छह महीने के भीतर मुख्य मामले का अंतिम निराकरण करने के निर्देश दिए।

बेटी के लिए 6000 रुपए महीना देने का आदेश

दरअसल मामला ये मामला एक दंपत्ति का था, जहां, उनका विवाह साल 2010 में हुआ था। दहेज प्रताड़ना के आरोपों के बाद अक्टूबर 2019 दोनों अलग रह रहे हैं। उनकी साल 2012 में जन्मी एक नाबालिग बेटी है। पत्नी ने अपने और बेटी के लिए अंतरिम भरण-पोषण की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में आवेदन दायर किया था। फैमिली कोर्ट ने पाया कि पत्नी आयुर्वेदिक विभाग में कंपाउंडर है और उसे 39,368 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है। इसलिए उसे अंतरिम गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया गया, लेकिन बेटी के लिए 6 हजार रुपए प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया गया। इस आदेश के खिलाफ पति और पत्नी दोनों हाईकोर्ट पहुंचे थे।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

उत्तर: हाईकोर्ट ने कहा कि मेंटेनेंस की राशि तय करने से पहले पति की वास्तविक आय, खर्च, कर्ज और उस पर आश्रित लोगों की स्थिति का आकलन करना जरूरी है।

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लेखक के बारे में

Deepak Dilliwar
Deepak Dilliwar

"दीपक दिल्लीवार, एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 10 साल का एक्सपीरिएंस है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक ऑनलाइन समाचार वेबसाइट से की थी, जहां उन्होंने राजनीति, खेल, ऑटो, मनोरंजन टेक और बिजनेस समेत कई सेक्शन में काम किया। इन्हें राजनीति, खेल, मनोरंजगन, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और बिजनेस से जुड़ी काफी न्यूज लिखना, पढ़ना काफी पसंद है। इन्होंने इन सभी सेक्शन को बड़े पैमाने पर कवर किया है और पाठकों लिए बेहद शानदार रिपोर्ट पेश की है। दीपक दिल्लीवार, पिछले 5 साल से IBC24 न्यूज पोर्टल पर लीडर के तौर पर काम कर रहे हैं। इन्हें अपनी डेडिकेशन और अलर्टनेस के लिए जाना जाता है। इसी की वजह से वो पाठकों के लिए विश्वसनीय जानकारी के सोर्स बने हुए हैं। वो, निष्पक्ष, एनालिसिस बेस्ड और मजेदार समीक्षा देते हैं, जिससे इनकी फॉलोवर की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। काम के इतर बात करें, तो दीपक दिल्लीवार को खाली वक्त में फिल्में, क्रिकेट खेलने और किताब पढ़ने में मजा आता है। वो हेल्दी वर्क लाइफ बैलेंस करने में यकीन रखते हैं।"

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Web Title: Alimony Law Changes High Court: Govt Employee Wife is Not Eligible for Alimony to Husband

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