Khandwa Lok Sabha Elections 2019 : खंडवा लोकसभा सीट, कांग्रेस बढ़त बनाए रखेगी या बीजेपी करेगी बराबरी, 19 मई को तय करेगी जनता | Khandwa Lok Sabha Elections 2019 : Khandwa Lok sabha Constituency : BJP VS Congress

Khandwa Lok Sabha Elections 2019 : खंडवा लोकसभा सीट, कांग्रेस बढ़त बनाए रखेगी या बीजेपी करेगी बराबरी, 19 मई को तय करेगी जनता

Khandwa Lok Sabha Elections 2019 : खंडवा लोकसभा सीट, कांग्रेस बढ़त बनाए रखेगी या बीजेपी करेगी बराबरी, 19 मई को तय करेगी जनता

: , March 9, 2021 / 11:04 PM IST

लोकसभा चुनाव के लिए मध्यप्रदेश में तीन चरणों का मतदान हो चुका है और चौथे चरण के लिए वोटिंग 19 मई को होनी है। चौथे चरण में प्रदेश की 8 सीटों पर मतदान होने हैं, जिनमें एक महत्वपूर्ण सीट खंडवा लोकसभा है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार खंडवा शहर का प्राचीन नाम खांडववन (खांडव वन) था जो मुगलों और अंग्रेजों के आने से बोलचाल में धीरे धीरे खंडवा हो गया। खंडवा नर्मदा और ताप्ती नदी घाटी के मध्य बसा है। ओमकारेश्वर यहां का लोकप्रिय और पवित्र दर्शनीय स्‍थल है। इसे भारत के 12 ज्योतिर्लिगों में शुमार किया जाता है।

खंडवा लोकसभा सीट पर सीट पर मुकाबला परंपरागत रुप से कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही होता आया है। बीजेपी के नंदकुमार चौहान इस सीट से सबसे ज्यादा बार जीतने वाले सांसद हैं। यहां की जनता ने उनको पांच बार चुनकर संसद पहुंचाया है। 1996, 1998, 1999 और 2004 का चुनाव जीतकर उन्होंने इस सीट पर अपना दबदबा बनाए रखा। हालांकि 2009 में उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा लेकिन इसके अगले चुनाव 2014 में उन्होंने इस सीट पर वापसी करते हुए जीत दर्ज की।

8 विधानसभा सीट

खंडवा लोकसभा क्षेत्र तहत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं। इनमें बगाली, पंधाना, भीखनगांव, मंधाता, नेपानगर,बदवाह, खंडवा, बुरहानपुर शामिल हैं। इनमें से 3 पर बीजेपी, 4 पर कांग्रेस और 1 सीट पर निर्दलीय का कब्जा है।

राजनीतिक इतिहास

खंडवा में लोकसभा का पहला चुनाव 1962 में हुआ था। कांग्रेस के महेश दत्ता ने पहले चुनाव में जीत हासिल की। कांग्रेस ने इसके अगले चुनाव 1967 और 1971 में भी जीत हासिल की। 1977 में भारतीय लोकदल ने इस सीट पर कांग्रेस को हरा दिया। कांग्रेस ने 1980 में यह सीट वापस छीन ली। तब शिवकुमार सिंह ने इस सीट पर कांग्रेस की वापसी कराई थी। कांग्रेस ने इसका अगला चुनाव भी जीता। 1989 में बीजेपी ने इस सीट पर पहली बार खाता खोला। हालांकि 1991 में उसे कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

1996 में बीजेपी की ओर से नंदकुमार चौहान चुनाव जीतने में भी कामयाब रहे। इसके बाद उन्होंने यहां से अगले 3 चुनाव जीते। 2009 में अरुण सुभाष चंद्र यादव ने यहां पर कांग्रेस की वापसी कराई। 2009 में हारने के बाद नंदकुमार ने एक बार फिर यहां पर वापसी की और अरुण सुभाष चंद्र यादव को मात दी। बीजेपी को यहां पर 6 बार तो कांग्रेस को 7 बार जीत मिली है।

जातिगत समीकरण

2011 की जनगणना के मुताबिक खंडवा की जनसंख्या 2728882 है। यहां की 76.26 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 23.74 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। खंडवा में 10.85 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति और 35.13 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है। यादव 2.4% हैं क्षत्रिय 6.4 और भील-भिलाला के 18 और मुस्लिम मतदाता 10 फीसदी हैं।

चुनावी मुद्दे

खंडवा लोकसभा सीट में महत्व के हिसाब से टूरिस्ट प्लेस के रुप में विकसित न किया जाना, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की डिमांड, पेयजल संकट, खंडवा-इंदौर फोरलेन बनाने की मांग, ट्रेनों की कमी फ्लाइओवर जैसे स्थानीय मुद्दे हैं। वहीं कांग्रेस कर्ज माफी को उपलब्धि बताते हुए मैदान में है तो वहीं बीजेपी इसे झूठ कहते हुए इसे ही हथियार बनाए हुए है।

2014 का जनादेश

विजयी प्रत्याशी  : नंदकुमार चौहान (बीजेपी) 717357 (57.05 फीसदी) वोट

फर्स्ट रनरअप   : अरूण यादव (कांग्रेस) 457643 (36.4 फीसदी) वोट

हार का अंतर   : 259714 मत

2014 में मतदाताओं की संख्या

कुल वोटर        : 17,59,410

पुरुष मतदाता    : 9,12,747

महिला मतदाता  : 8,46, 663

कुल मतदान      : 71.46 फीसदी