माओवादी कमांडर पापा राव ने अपने 17 सहयोगियों के साथ किया आत्मसमर्पण
माओवादी कमांडर पापा राव ने अपने 17 सहयोगियों के साथ किया आत्मसमर्पण
कवर्धा/रायपुर (छत्तीसगढ़), 24 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के वरिष्ठ कमांडर पापा राव ने मंगलवार को अपने दल के 17 सदस्यों के साथ सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक पापा राव का समर्पण छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव है।
उन्होंने बताया कि यह समर्पण देश के सबसे लंबे समय से चल रहे उग्रवादों में से एक के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, ‘‘ नक्सली संगठन में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव का 17 अन्य साथियों के साथ पुनर्वास, क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के हमारे सतत प्रयासों में एक निर्णायक सफलता का प्रतीक है।’’
सुंदरराज ने बताया कि पापा राव, डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 18 माओवादियों के इस समूह ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिला नक्सली भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आत्मसपर्मण के दौरान एके-47 राइफलें तथा अन्य हथियार भी सौंपे।
उन्होंने कहा कि दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार नक्सल संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है।
सुंदरराज ने कहा कि सरकार की परिकल्पना और क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप, बस्तर अब एक नई ऊर्जा, नए उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरने की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने बताया कि डीकेएसजेडसी बस्तर संभाग और पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है और इसे प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही थी।
सुंदरराज ने कहा, ‘‘हमें आशा है कि शेष बचे माओवादी, जो वर्तमान में छोटे-छोटे समूहों में भटक रहे हैं, भी आने वाले दिनों में हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगे।’’
उन्होंने बताया कि साउथ सब जोनल ब्यूरो इलाके से जुड़े समर्पण करने वाले सभी 18 माओवादियों को औपचारिक रूप से मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी।
दो दशकों से ज़्यादा समय तक घने इंद्रावती-अबुझमाड़ जंगल इलाके में सक्रिय रहे पापा राव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े आखिरी बड़े कमांडरों में से एक है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पापा राव ने दक्षिण बस्तर में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमलों की साज़िश रची थी, जिनमें 2010 का ताड़मेटला हमला (तब के दंतेवाड़ा ज़िले में, जो अब सुकमा में है) भी शामिल है। इस हमले में 76 जवान मारे गए थे।
इससे पहले दिन में, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह मंत्रालय का प्रभार भी है, ने कहा कि राव, जिन्हें मंगू के नाम से भी जाना जाता है, बस्तर इलाके में अपने दल के एक दर्जन से अधिक सदस्यों के साथ समर्पण करेंगे।
शर्मा ने कहा, ‘‘इस समर्पण के साथ ही, राज्य में उस वरिष्ठ स्तर का कोई भी नक्सली नेता सक्रिय नहीं रहेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ 31 मार्च, 2026 की तय समयसीमा तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’’
अधिकारियों ने बताया कि यह समर्पण भाकपा (माओवादी) से जुड़े माओवादी नेटवर्क के बड़े पैमाने पर कमजोर पड़ने का संकेत है, जिसने सालों तक मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अपनी समानांतर सत्ता कायम रखी थी।
उन्होंने कहा कि ‘रेड कॉरिडोर’ कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से होते हुए ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैला हुआ था और नक्सलियों के प्रभाव वाले इस गलियारे को देश के लिए ‘सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ माना जाता था।
अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में शासन-प्रशासन कमज़ोर पड़ गया था, और माओवादियों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच जोर-जबरदस्ती और सहमति, दोनों के जरिए अपना प्रभाव जमा रखा था।
उन्होंने बताया कि 2014 से 2026 की शुरुआत तक पूरे देश में 10 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से अकेले 2025 में 2,300 नक्सलियों ने हथियार डाले, और 2026 के पहले तीन महीनों में ही 630 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
औपचारिक आत्मसमर्पण से कुछ घंटे पहले शर्मा ने बताया था, ‘‘पापा राव लगभग 25 वर्षों से जंगलों में सक्रिय था और कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ हुई, लेकिन हर बार वह बच निकला। राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया है।’’
उन्होंने कहा कि राज्य में पुनर्वास प्रयासों के तहत, आने वाले सप्ताह में और भी नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने की संभावना है।
शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ से जुड़े कुछ ही नाम अब सक्रिय बचे हैं, और वे भी फिलहाल गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) या तेलंगाना में सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि वहां भी उनके आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को आसान बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘इस (राव के) पुनर्वास के साथ, छत्तीसगढ़ के इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी असल में खत्म हो जाएगी। 31 मार्च तक छत्तीसगढ़ सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा।’’
भाषा संजीव धीरज
धीरज
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Web Title: माओवादी कमांडर पापा राव ने अपने 17 सहयोगियों के साथ किया आत्मसमर्पण
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