Reported By: Rambhuvan Gautam
,Nagar Parishad Employees Terminated : कर रहे थे दिवाली बोनस का इंतजार...आ गया नौकरी से निकालने का आदेश, नगर परिषद के 70 से अधिक कर्मचारी बर्खास्त, 200 से अधिक पर लटकी तलवार / Image : IBC24 Original
अनूपपुर: Nagar Parishad Employees Terminated बनगवां नगर परिषद में हुए कथित अवैध संविलियन मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके जरिए बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को राहत मिली थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शासन की कार्रवाई को बहाल करते हुए साफ किया कि अनियमित तरीके से मिली नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद बनगवां नगर परिषद के 72 कर्मचारी जो कि तथाकथित फर्जी संविलियन के जरिए भर्ती हुए थे उनकी सेवाएं समाप्त हो गई है। वहीं उक्त आदेश के आधार पर अब अनूपपुर जिले के तीन अन्य नगर परिषद डोल, डूमरकछार और बरगवां के लगभग 200 से ज्यादा कर्मचारी के ऊपर सेवा समाप्ति की तलवार लटक रही है।
Nagar Parishad Employees Terminated पूरा मामला साल 2016 का है। 26 सितंबर 2016 को तत्कालीन ग्राम पंचायत बनगवां को नगर परिषद का दर्जा दिया गया था। नगर परिषद बनने के बाद पंचायत में पहले से कार्यरत कर्मचारियों के संविलियन की प्रक्रिया शुरू हुई। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और ऐसे लोगों के नाम भी संविलियन सूची में शामिल कर दिए गए, जो पंचायत में नियमित रूप से कार्यरत नहीं थे। मामले की शिकायत के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने जांच कराई। जांच में पंचायत के पुराने रिकॉर्ड और नगर परिषद के संविलियन अभिलेखों में कई विसंगतियां सामने आने की बात कही गई। इसके बाद शासन ने मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम की धारा 331(2) के तहत कार्रवाई करते हुए 15 जुलाई 2022 को अवैध संविलियन निरस्त किया और 22 जुलाई 2022 को संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं।
शासन की कार्रवाई के खिलाफ कर्मचारी हाईकोर्ट पहुंचे। 23 जनवरी 2024 को सिंगल बेंच ने बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया था। सिंगल बेंच का आधार था कि कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की। डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कर्मचारियों को दिए गए नोटिस और सुनवाई से जुड़े दस्तावेज पेश किए गए। शासन का पक्ष था कि कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से नोटिस देने के साथ-साथ WhatsApp के जरिए भी सूचना दी गई थी। 22 और 23 अप्रैल 2022 को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया और 12 मई 2022 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। कोर्ट ने इन तथ्यों और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए सिंगल बेंच के फैसले में हस्तक्षेप को उचित नहीं माना।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने राज्य शासन की रिट अपीलें स्वीकार कर लीं और सिंगल बेंच का आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि अनियमितताओं को दूर करने के लिए धारा 331(2) के तहत शासन के पास कार्रवाई करने का अधिकार है और पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए जाने के बाद केवल इसी आधार पर कार्रवाई को रद्द नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के इस फैसले का असर अब सिर्फ बनगवां तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। अनूपपुर जिले की डोला, डूमरकछार और बरगवां नगर परिषदों में हुए संविलियन भी जांच और कानूनी समीक्षा के दायरे में आ सकते हैं। इन निकायों में करीब 200 से ज़्यादा कर्मचारी संविलियन प्रक्रिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन कर्मचारियों की सेवाएं स्वतः समाप्त मानी जाएंगी या नहीं, यह संबंधित मामलों के तथ्यों, रिकॉर्ड और आगे होने वाली प्रशासनिक अथवा न्यायिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।