Reported By: Abhishek Mishra
,Saharanpur Bulldozer Action: प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर चला बुलडोजर, जानिए कोर्ट ने क्यों माना था अवैध?
सहारनपुर। Saharanpur Bulldozer Action: यूपी के सहारनपुर में आज सुबह प्रशासन ने बड़ी करवाई की है, कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद (Saharanpur Mosque) ढहा दी गई। कल रात भी इसे तोड़ने की सूचनाएं फैली तो DM ने भीड़ को ऐसा कहकर शांत किया कि मस्जिद सिर्फ सील की जाएगी। आज सुबह लोग नींद से उठे तो मस्जिद जमींदोज हो चुकी थी। 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस मस्जिद का निर्माण अवैध माना था। जिसके बाद जिला अदालत के आदेश पर ये बुलडोजर कार्रवाई की गई है। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
मस्जिद कमेटी ने कोर्ट में 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल दिखाकर बताया कि कलक्ट्रेट से पहले ही यहां मस्जिद बन गई थी। जबकि प्रशासन ने सबूत रखा कि सहारनपुर में पहली बार बिजली ही 1912 में आई थी। बीती रात मस्जिद को खाली करा लिया गया था। सुबह लोग आए तो यहाँ मस्जिद (UP Mosque Demolition) तोड़ी जा चुकी थीं।
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को खाली करने का आदेश दिया था, उसे गिराने का नहीं।
बजरंग दल नेता विकास त्यागी ने शिकायत किया था कि इस मस्जिद का निर्माण अति संवेदनशील और गोपनीय कार्यों वाले जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अवैध रूप से किया गया है। जिसका उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक लाभ के लिए भी किया जा रहा था। मस्जिद में एक डाकघर का संचालन होने के साथ-साथ बाहरी लोगों को कमरे किराए पर दिए गए थे। शिकायत में यह भी बताया गया था कि इस परिसर का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक लाभ के लिए भी किया जा रहा था, जहाँ एक डाकघर का संचालन होने के साथ-साथ बाहरी लोगों को कमरे किराए पर दिए गए थे और उनका किराया मस्जिद कमेटी द्वारा वसूला जा रहा था। बाहरी लोगों के दिन-रात बेरोक-टोक आवागमन से जिलाधिकारी कार्यालय की सुरक्षा और गोपनीयता पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।
Saharanpur Bulldozer Action मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में पीपी एक्ट के तहत वाद दायर किया था। नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने गत 16 जुलाई 2026 को अपने आदेश में मस्जिद को अवैध मानते हुए बेदखली और 6,41,65,500 रुपये की भारी-भरकम क्षतिपूर्ति लगाते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए थे। जिला न्यायालय ने भी अपने इस ताज़ा फैसले में नगर मजिस्ट्रेट द्वारा लगाई गई 6,41,65,500 रुपए की क्षतिपूर्ति को पूरी तरह बरकरार रखा है। इसके बाद मस्जिद पक्ष ने 22 जुलाई 2026 को जिला न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी थी और 24 जुलाई 2026 को स्टे प्राप्त कर लिया था। जिला न्यायालय में चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों द्वारा रखे गए तर्कों और साक्ष्यों की गहन समीक्षा की गई।
मस्जिद पक्ष की ओर से 1 जनवरी 1911 का बिजली का बिल दाखिल कर यह दावा किया गया था कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट से भी पहले की बनी हुई है। इसके प्रतिउत्तर में ठोस साक्ष्यों के आधार पर यह उजागर किया गया कि सहारनपुर शहर में बिजली 1922 में पहुँची थी और इसका वितरण 1928 से शुरू हुआ था, ऐसे में 1911 में बिजली का कनेक्शन प्राप्त होना असंभव है। इसके अतिरिक्त, 1 जनवरी 1911 को रविवार (अवकाश का दिन) होने के कारण उस तिथि को कनेक्शन जारी होने का दावा भी पूरी तरह फर्जी साबित हुआ। इसके अलावा, फसली वर्ष 1296 (सन 1889) के खसरे के अनुसार मौजा पठानपुरा में खेवट सरकार केसरी हिंद के रूप में कचहरी और कलेक्ट्रेट ही दर्ज होने से यह स्पष्ट हो गया कि कलेक्ट्रेट से पहले वहाँ किसी मस्जिद का अस्तित्व नहीं था। इस संदर्भ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि खसरा संख्या 539, रकबाई 28.04 बीघा (यानी 5.780 हेक्टेयर), ग्राम पठानपुरा, तहसील व जिला सहारनपुर कचहरी/कलेक्ट्रेट स्थित है, और खसरा संख्या 539 प्रदेश राज्य में निहित सरकारी संपत्ति है।
यूपी : सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद आज सुबह 5 बजे ढहा दी गई। कल रात भी इसे तोड़ने की सूचनाएं फैली तो DM ने भीड़ को ऐसा कहकर शांत किया कि मस्जिद सिर्फ सील की जाएगी। आज सुबह लोग नींद से उठे तो मस्जिद जमींदोज हो चुकी थी। 16 जुलाई को जिला प्रशासन ने इस मस्जिद का निर्माण… https://t.co/gii3i2xx1T pic.twitter.com/jkRM4XqxEf
— Sachin Gupta (@Sachingupta) September 5, 2026