इंदौर, तीन अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर के एक अवैध वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं से मारपीट की घटना पर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सोमवार को राज्य सरकार से इंदौर संभाग के सभी वृद्धाश्रमों का ब्योरा तलब किया।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उन वृद्धाश्रमों का निरीक्षण करे जहां इस आश्रय गृह के बुजुर्गों को स्थानांतरित किया गया है और उनकी स्थिति पर रिपोर्ट पेश करे।
इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित वृद्धाश्रम के सभी बुजुर्गों को अन्य सरकारी आश्रय गृहों में भेज दिया गया है।
इस पर अदालत ने पूछा कि इंदौर संभाग में कुल कितने वृद्धाश्रम हैं, उनमें कितने लोगों को रखा जा सकता है और वर्तमान में वहां कितने लोग रह रहे हैं?
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक यह जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
इस बीच, प्रशासन ने नगर निगम के परिसर में अवैध कब्जा करके शुरू किए गए ‘प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम’ के भवन को ध्वस्त कर दिया।
अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) निधि वर्मा ने बताया कि जांच में सामने आया कि बाणगंगा थाना क्षेत्र में नगर निगम के करीब 8,000 वर्ग फुट में फैले परिसर में पिछले चार वर्षों से अवैध कब्जा करके वृद्धाश्रम संचालित किया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि वृद्धाश्रम की संचालक नीलम दुबे से परिसर खाली कराया गया और अवैध कब्जा हटाने के बाद नगर निगम को इसका आधिपत्य सौंप दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने 30 जुलाई को इस वृद्धाश्रम को सील कर दिया था और इसमें रह रहे 31 वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक न्याय विभाग के मान्यता प्राप्त अन्य वृद्धाश्रमों में स्थानांतरित कर दिया था।
अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई तब शुरू हुई, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें 14 वर्षीय लड़का वृद्धाश्रम की बुजुर्ग महिलाओं को डंडे से पीटता दिखाई दिया था।
उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया कि वृद्धाश्रम बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किया जा रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि बुजुर्ग महिलाओं की पिटाई करने वाले अनाथ लड़के को संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया गया था।
भाषा हर्ष जितेंद्र
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