भोजशाला विवाद : हिंदू पक्ष ने कहा,’हमारे मुकदमे का समर्थन करते हैं एएसआई के दस्तावेज’

भोजशाला विवाद : हिंदू पक्ष ने कहा,'हमारे मुकदमे का समर्थन करते हैं एएसआई के दस्तावेज'

भोजशाला विवाद : हिंदू पक्ष ने कहा,’हमारे मुकदमे का समर्थन करते हैं एएसआई के दस्तावेज’
Modified Date: April 9, 2026 / 09:04 pm IST
Published Date: April 9, 2026 9:04 pm IST

इंदौर, नौ अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में धार के भोजशाला विवाद को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले हिंदू पक्ष के एक संगठन ने बृहस्पतिवार को दलील पेश की कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और इस निकाय के अन्य दस्तावेज उसके मुकदमे का समर्थन करते हैं।

विवादित परिसर का संरक्षण कर रही एएसआई मुकदमे के प्रतिवादियों में शामिल है। याचिका में हिंदू संगठन का दावा है कि 11वीं सदी के इस स्मारक में देवी सरस्वती का मंदिर पहले से विद्यमान था जिसे ढहाये जाने के बाद इसके अवशेषों का मस्जिद निर्माण में फिर इस्तेमाल किया गया।

भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ भोजशाला के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रही है। सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जा रही हैं।

नियमित सुनवाई के चौथे दिन याचिकाकर्ताओं में शामिल संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के सामने अपनी दलीलें पूरी कीं।

जैन ने कहा कि विवादित परिसर में देवी सरस्वती का मंदिर पहले से मौजूद था जिसे ‘मूर्ति पूजा के विरोध की मानसिकता वाले’ मुस्लिम शासकों ने ढहा दिया था और वहां मस्जिद बनाने के लिए मंदिर के अवशेषों का फिर से इस्तेमाल किया गया था।

उन्होंने भोजशाला परिसर में एएसआई के 2024 के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट, मुकदमे में इस निकाय के पेश जवाबों तथा हलफनामों और 1902 एवं 1904 में एएसआई के प्रकाशित ऐतिहासिक दस्तावेजों को आधार बनाते हुए यह दावा किया।

जैन ने कहा कि मौके की वास्तविक स्थिति पर आधारित एएसआई की यह सामग्री उनके मुकदमे का समर्थन करती है।

हिंदू पक्ष के वकील ने कहा,‘‘इसका यह मतलब कतई नहीं है कि एएसआई किसी का पक्ष ले रहा है। एएसआई इस सामग्री में वही बात कह रहा है कि जो मामले के तथ्य हैं और जो चीजें मौके पर मौजूद हैं।’’

बहरहाल, जैन जब एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अंशों का सिलसिलेवार उल्लेख कर रहे थे, तब केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस रिपोर्ट का अदालत के सामने विस्तार से वर्णन करना एएसआई का काम है।

मुस्लिम पक्ष के एक हस्तक्षेपकर्ता के वकील ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि हिंदू पक्ष के वकील प्रतिवादियों में शामिल एएसआई के दस्तावेजों के बूते अपनी दलीलों को पुष्ट कर रहे हैं जो कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है।

आपत्तियों पर गौर के बाद उच्च न्यायालय ने जैन को एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के कुछ महत्वपूर्ण अंशों को रेखांकित करने की अनुमति दी।

जैन ने न्यायालय को बताया कि इस रिपोर्ट में भोजशाला परिसर में मंदिर होने के कई प्रमाण हैं और विवादित स्मारक में हिन्दुओं के धार्मिक प्रतीक चिन्हों एवं संस्कृत के शिलालेखों के साथ ही देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों के अवशेष अब भी मौजूद हैं।

उन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एएसआई की रिपोर्ट को विधिक मान्यता हासिल है।

जैन ने भोजशाला में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार लगाते हुए एएसआई के 2003 के एक आदेश को चुनौती भी दी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उसे एएसआई के इस आदेश के मामले में दखल देना चाहिए जिसके तहत विवादित स्मारक में हर मंगलवार को हिंदुओं और हर शुक्रवार को मुस्लिमों को उपासना की अनुमति दी गई है।

उच्च न्यायालय ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। एएसआई ने 22 मार्च 2024 से इस परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया था। एएसआई ने 98 दिन के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 15 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की थी।

एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भोजशाला परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था।

मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के सर्वेक्षण पर सवाल उठाते हुए हिंदुओं के इस दावे को खारिज किया है कि भोजशाला परिसर मूलत: एक मंदिर है।

मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि एएसआई ने उसकी पुरानी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए विवादित परिसर में ‘पीछे के रास्ते से रखी गईं चीजों’ को भी सर्वेक्षण में शामिल किया।

भाषा हर्ष

राजकुमार

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