Face To Face MadhyaPradesh: वीडी-सिंधिया का प्रहार… दिग्गी-कमलनाथ खबरदार! MP की सियासत में फिर से खोदे जा रहे गड़े मुर्दे…
Face To Face Madhya Pradesh | MP Politics: वीडी-सिंधिया का प्रहार... दिग्गी-कमलनाथ खबरदार! MP की सियासत में फिर से खोदे जा रहे गड़े मुर्दे
Face To Face Madhya Pradesh: भोपाल। कहते हैं सियासत में गड़े मुर्दों की भी बड़ी कीमत होती है। सही वक्त पर अगर गड़े मुर्दे भी खोद लिए जाएं। विरोधियों की परेशानी बढ़ जाती है। इस वक्त एमपी की सियासत में फिर से गड़े हुए मुर्दे निकाले जा रहे हैं। किसने, किसे सड़क पर उतर जाने को कहा था? किसने किसकी सरकार क्यों गिराई थी? अब तक तो आप समझ ही गए होंगे। हम बात कर रहे हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के बीच सियासी अदावत की। साथ में वीडी शर्मा ने अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंदी दिग्विजय सिंह की स्थिति पर भी तंज कसा है। तो क्या इस बार कांग्रेस के 2 सबसे बड़े दिग्गजों के खिलाफ बीजेपी सीधे भिड़ने के मूड में है।
कहते हैं सियासत में विरोधी के खिलाफ सबूत और बयान उस वक्त के लिए बचाकर रख जाते हैं जब उसकी जरुरत सबसे ज्यादा हो और बीजेपी के दो बड़े नेताओं के बयानों से आप ये समझ भी सकते हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा ने अपने परंपरागत सियासी विरोधी दिग्विजय सिंह को रोने वाला बताकर उनकी हालत खराब करार दे रहे हैं तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इशारों ही इशारों में कमलनाथ को वो बयान याद दिला दिया जिसने उन्हें एक झटके में मुख्यमंत्री से पूर्व मुख्यमंत्री बना दिया। पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया का टीकमगढ़ वाला वो पुराना वाला बयान सुनिए जो उन्होंने कांग्रेस में रहने के दौरान दिया था।
ये अदावत फरवरी 2020 में शुरु हुई थी जिसका नतीजा अगले कुछ दिनों में मध्यप्रदेश की सियासत में नजर आया और 18 साल बाद बनी कांग्रेस की सरकार धाराशाही हो गई। लेकिन यहां कमलनाथ का भी वो पुराना बयान सुनना जरुरी है जो उन्होंने तब एमपी कॉर्डिनेशन कमेटी से बाहर आने के बाद दिया था। ऐसे में जब लोकसभा चुनाव का प्रचार धीरे धीरे गर्मी पकड़ रहा है। पुराने बयान फिर मुद्दा बन रहे, सिंधिया कमलनाथ के बयान को अपने और परिवार के लोगों के सम्मान से जोड़कर मतदाताओं को अपने साथ लाने में जुटे हैं वही वी डी शर्मा दिग्विजय सिंह के बहाने सभी कांग्रेसियों को कमलोर और लाचार बता रहे हैं।
सिंधिया और वी डी शर्मा के ये तेवर आने वाले दिनों में बीजेपी के रुख की तरफ साफ इशारा कर रहे हैं कि पार्टी इस बार दिग्विजय सिंह और कमलनाथ को पूरी तरह से पटखनी देना चाहती है, लेकिन कुछ सवाल भी है कि क्या राजगढ़ में दिग्विजय और छिंदवाड़ा में कमलनाथ की घेरेबंदी इतनी आसान है? क्या सालों से जिस क्षेत्र में दिग्विजय-कमलनाथ सक्रिय है वहां इस तरह के बयानों का असर होगा? यदि इन नेताओं ने इमोशनल कॉर्ड चल दिया तो उसका तोड़ निकालेगी बीजेपी। क्या महज पाला बदलने वाले नेताओं के दम पर बीजेपी जीत की उम्मीद कर रही है? वैसे आपको एक सवाल का जवाब शायद मिल जाए जब आप पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को सुनेंगे जो अब छिंदवाड़ा से बीते 45 साल के रिश्तों को याद दिलाने में लग गए हैं।
Face To Face Madhya Pradesh: 3 यदि आप पिछले कुछ चुनावों को देखेंगे तो समझ आएगा कि जनता के मुद्दे धीरे धीरे धीरे पीछे छूट जाते हैं और नेताओं में अपने विरोधी को बयानों में उलझाकर हराने की रणनीति ज्यादा कारगर साबित हो रही है और इसी की नतीजा है कि जब पहले चरण की वोटिंग होने के पहले ही सुरजेवाला, चरणदास महंत और सुप्रिया श्रीनेत के बयानों को बीजेपी ने भुनाने मे कोई कसर नहीं छोड़ी।

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