Dhar Bhojshala Supreme Court Judgement: धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत, शुक्रवार को 1-3 बजे तक नमाज के लिए मिलेगी जगह

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Dhar Bhojshala Supreme Court Judgement: धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत, शुक्रवार को शुक्रवार को 1-3 बजे तक नमाज के लिए मिलेगी जगह

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  • Publish Date - July 14, 2026 / 02:23 PM IST,
    Updated On - July 14, 2026 / 02:25 PM IST

Dhar Bhojshala Supreme Court Judgement: धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत, शुक्रवार को शुक्रवार को 1-3 बजे तक नमाज के लिए मिलेगी जगह / Image; FIle

HIGHLIGHTS
  • मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज के लिए अलग स्थान देने का अंतरिम निर्देश
  • केंद्र सरकार, एएसआई और हिंदू पक्ष को नोटिस जारी कर मामले में जवाब मांगा
  • भोजशाला परिसर में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं करने का आदेश

धार: Dhar Bhojshala Supreme Court Judgement मध्यप्रदेश के धार में स्थिति ऐतिहासिक भोजशाला के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज के लिए जगह देने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भोजशाला परिसर में शुक्रवार को 1-3 बजे तक नमाज के लिए जगह दी जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ASI और केंद्र सहित हिंदू पक्ष को भी नोटिस जारी किया है। बता दें कि इससे पहले मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना था। वहीं, मामले में नया मोड़ आ गया है।

भोजशाला मामले में आया नया मोड़

Dhar Bhojshala Supreme Court Judgement सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि शुक्रवार को होने वाली नमाज पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हमें अब परिसर से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है और पिछले 40 साल से जो नमाज निर्बाध रूप से चल रही थी, उस पर भी अचानक रोक लगा दी गई है। सुनवाई के शुरुआत में ही मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत से मांग की है कि परिसर में पिछले 40 साल पुरानी स्थिति को दोबारा बहाल (Status Quo) किया जाए। इन दलीलों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट इस मामले में नोटिस जारी करेगा और आगे की सुनवाई के लिए एक तारीख तय की जाएगी।

शुक्रवार को नमाज के लिए मिलेगी जगह

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज जारी रखने की मुस्लिम पक्ष की मांग पर अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा कि क्या भोजशाला परिसर के आसपास नमाजियों के लिए कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। CJI सूर्य कांत ने मुस्लिम पक्ष से भी सवाल किया, “क्या हम आसपास के एरिया में नमाज की व्यवस्था के आदेश दे सकते हैं? जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक के लिए ऐसी अंतरिम व्यवस्था की जा सकती है।” चीफ जस्टिस ने आगे कहा, “हमने पहले बसंत पंचमी के दिन भी एक अंतरिम व्यवस्था की थी और दोनों पक्षों को पूजा-अर्चना की इजाजत दी थी। हमने वह आदेश तब दिया था जब मामला अदालत में विचाराधीन था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फाइनल फैसला आ चुका है।”

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मुस्लिम पक्ष की उन अपीलों पर जारी किया गया है जिनमें हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है। इसमें धार जिले के विवादित 11वीं सदी के भोजशाला-कमल मौला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले की जांच करेगा और इस बीच, अंतरिम उपाय के तौर पर मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने के लिए कॉम्प्लेक्स के पास एक अलग खुली जगह दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) शीर्ष अदालत की अनुमति के बिना कोई भी संरचनात्मक बदलाव न करे।

हाईकोर्ट ने सुनाया था हिंदुओं के पक्ष में फैसला

आपको बता दें कि, इससे पहले मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भोजशाला परिसर माँ सरस्वती का मंदिर है और हिंदू पक्ष को यहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी जाती है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है और बीजेपी विधायक रामेश्नेवर शर्मा इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सनातन आस्था की जीत बताया है।

कोर्ट ने ASI सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख किया

कोर्ट ने अपने फैसले में ASI सर्वे रिपोर्ट का भी विस्तार से उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों पर देवी-देवताओं के स्वरूप और धार्मिक आकृतियां स्पष्ट रूप से दिखाई दीं। इसके अलावा भोजशाला के खंभों पर की गई नक्काशी को राजा भोज के काल का बताया गया, जो मंदिर वास्तुकला और हिंदू संस्कृति की पहचान मानी गई। कोर्ट ने यह भी माना कि परिसर में मौजूद हवन कुंड मंदिर होने का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है।

Bhojshala Temple Controversy: माँ वाग्देवी की प्रतिमा का भी जिक्र किया गया है

ASI सर्वे के दौरान परिसर से कई खंडित देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मिली थीं, जिन्हें अदालत ने अहम साक्ष्य माना। वहीं, फैसले में माँ वाग्देवी की प्रतिमा का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बात पर विचार करने को कहा है कि लंदन म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को वापस भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

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भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक भोजशाला परिसर के पास अलग स्थान पर नमाज की अनुमति देने का निर्देश दिया है। साथ ही केंद्र, एएसआई और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है।

क्या सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया है?

नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को फिलहाल रद्द नहीं किया है। उसने मामले में नोटिस जारी कर विस्तृत सुनवाई के लिए अगली तारीख तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।

भोजशाला मामले में हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना था और हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी।

एएसआई को सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया है कि उसकी अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं किया जाए।

ASI सर्वे रिपोर्ट में क्या प्रमुख बातें सामने आई थीं?

एएसआई सर्वे में परिसर में देवी-देवताओं की आकृतियां, मंदिर शैली की नक्काशी, हवन कुंड और खंडित मूर्तियों जैसे साक्ष्यों का उल्लेख किया गया था, जिनका हाई कोर्ट ने अपने फैसले में संदर्भ दिया था।