इंदौर दूषित जल मामले से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं : मप्र उच्च न्यायालय

इंदौर दूषित जल मामले से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं : मप्र उच्च न्यायालय

इंदौर दूषित जल मामले से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं : मप्र उच्च न्यायालय
Modified Date: January 21, 2026 / 02:39 pm IST
Published Date: January 21, 2026 2:39 pm IST

इंदौर, 21 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप फैलने संबंधित मूल दस्तावेज सुरक्षित रखे जिनमें पेयजल पाइपलाइन बिछाने की निविदा और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट शामिल हैं।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई कर रही है।

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। बाद में अदालत ने आदेश पारित करते हुए कहा,‘‘यह निर्देश दिया जाता है कि इंदौर के जिलाधिकारी और नगर निगम के आयुक्त सुनिश्चित करेंगे कि याचिकाओं के विषय से संबंधित रिकॉर्ड, भागीरथपुरा में पीने के पानी की अलग पाइपलाइन बिछाने की निविदा के दस्तावेज और पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आदि सुरक्षित अभिरक्षा में रखे जाएं।’’

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उच्च न्यायालय में मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि भागीरथपुरा में पीने के पानी की अलग पाइपलाइन बिछाने की निविदा और इस इलाके में वितरित पेयजल के नमूनों को लेकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट से संबंधित मूल दस्तावेजों में हेर-फेर की जा सकती है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में राज्य सरकार से यह भी कहा कि वह उसके छह जनवरी के अंतरिम निर्देशों का सख्ती से पालन करना जारी रखे तथा एक और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

अदालत के इन निर्देशों में चिकित्सा के निःशुल्क इंतजाम करके भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप से निपटने, लोगों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने, दूषित जलस्रोतों का उपयोग रोकने, पेयजल की जांच और कीटाणुशोधन को सुदृढ़ करने, जलापूर्ति की अवसंरचना को उन्नत करने और दीर्घकालिक जल सुरक्षा योजना लागू करने के उपाय करने को कहा गया था।

उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तारीख तय की है और प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को निर्देश दिया है कि वह इस तारीख को भी ऑनलाइन माध्यम से अदालत के सामने हाजिर रहें।

राज्य सरकार ने मंगलवार को उच्च न्यायालय को बताया था कि भागीरथपुरा में पीने के पानी के दूषित होने के कारणों की जांच, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के वास्ते आवश्यक उपायों और जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।

उधर, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में कहा था कि यह समिति भागीरथपुरा मामले में गंभीर चूक करने वाले उच्च अधिकारियों को बचाने के लिए ‘एक दिखावा मात्र’ है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम, उच्च न्यायालय के अंतरिम निर्देशों का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं। राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान इस दावे को खारिज किया था।

उन्होंने उच्च न्यायालय के अंतरिम निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रस्तावित निगरानी समिति के स्वतंत्र सदस्यों के नामों के बारे में सुझाव देने के लिए अदालत से मोहलत मांगी है।

स्थानीय लोगों ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप में अब तक 25 लोगों की मौत का दावा किया है, जबकि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में 15 जनवरी को पेश स्थिति रिपोर्ट में इस प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत सात लोगों की मौत का जिक्र किया था।

मृतकों के आंकड़े को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति के किए गए ‘डेथ ऑडिट’ की रिपोर्ट में संकेत मिला है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत इस प्रकोप से किसी न किसी तरह जुड़ी हो सकती है।

भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था।

अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में 51 नलकूपों में दूषित पानी मिला और पानी की जांच रिपोर्ट में इसमें ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि इस बैक्टीरिया के कारण भागीरथपुरा में बड़े पैमाने पर लोग संक्रमित हुए।

अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में रिसाव के कारण इसमें एक शौचालय के सीवर का पानी भी मिला था।

भाषा हर्ष मनीषा धीरज

धीरज


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