जबलपुर में छोटे हथियारों के नियंत्रण पर पहले संयुक्त राष्ट्र फैलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत

जबलपुर में छोटे हथियारों के नियंत्रण पर पहले संयुक्त राष्ट्र फैलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत

जबलपुर में छोटे हथियारों के नियंत्रण पर पहले संयुक्त राष्ट्र फैलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत
Modified Date: February 16, 2026 / 07:18 pm IST
Published Date: February 16, 2026 7:18 pm IST

जबलपुर, 16 फरवरी (भाषा) शांति और निरस्त्रीकरण प्रयासों में भारत के वैश्विक योगदान को बढ़ावा देते हुए भारतीय सेना मध्यप्रदेश के जबलपुर में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए छोटे और हल्के हथियारों के नियंत्रण पर संयुक्त राष्ट्र फैलोशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम (एसएएलडब्ल्यू) की मेजबानी कर रही है।

जबलपुर के मिलिट्री कॉलेज ऑफ मैटेरियल्स मैनेजमेंट (एमसीएमएम) में सोमवार को शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 मार्च को समाप्त होगा।

एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि विदेश और रक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 13 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

फेलोशिप की शुरुआत यूएनआरसीपीडी (एशिया पैसिफिक) के निदेशक दीपायन बसु रे द्वारा संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण कार्यक्रम की समीक्षा करने के साथ हुई।

लेफ्टिनेंट जनरल संजय सेठी ने अवैध हथियारों की आपूर्ति से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में बहुपक्षीय सहयोग के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया और संयुक्त राष्ट्र ढांचे के तहत वैश्विक शांति, जिम्मेदार हथियार प्रबंधन और क्षमता निर्माण साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

बयान में कहा गया कि यह फैलोशिप संयुक्त राष्ट्र प्रोग्राम ऑफ़ एक्शन (पीओए) और ‘इंटरनेशनल ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट’ (आईटीआई) को लागू करने के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों की तकनीकी और परिचालन क्षमता को बढ़ाने की खातिर बनाई गई है।

ये दोनों कार्यक्रम छोटे और हल्के हथियारों के अवैध व्यापार, हेराफेरी और दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से बनाए गए प्रमुख वैश्विक ढांचे हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह पहल क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, ‘ट्रेसिंग सिस्टम’ में सुधार और भंडार प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बयान में कहा गया है कि यह कार्यक्रम न केवल वैश्विक निरस्त्रीकरण प्रयासों को मजबूत करता है बल्कि बहुपक्षीय शांति और सुरक्षा पहल में भारत के बढ़ते योगदान को भी दर्शाता है।

भाषा ब्रजेन्द्र रवि कांत अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में