Guna Murder Case : बहनोई की हत्या मामले में आरोपी को कड़ी सजा, मर्डर कर कुएं में फेंकी थी लाश, पढ़िए दिल दहला देने वाली हत्याकांड की पूरी कहानी

Guna Murder Case : बहनोई की हत्या मामले में आरोपी को कड़ी सजा, मर्डर कर कुएं में फेंकी थी लाश, पढ़िए दिल दहला देने वाली हत्याकांड की पूरी कहानी

Guna Murder Case : बहनोई की हत्या मामले में आरोपी को कड़ी सजा, मर्डर कर कुएं में फेंकी थी लाश, पढ़िए दिल दहला देने वाली हत्याकांड की पूरी कहानी

Guna Murder Case/Photo Credit: IBC24

Modified Date: April 29, 2026 / 03:18 pm IST
Published Date: April 29, 2026 3:18 pm IST
HIGHLIGHTS
  • साले ने बहनोई की हत्या कर शव कुएं में फेंका
  • कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से केस सिद्ध
  • सत्र न्यायालय ने आरोपी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

Guna Murder Case : मध्यप्रदेश के गुना जिले में बहनोई की हत्या कर शव को कुएं में फेंकने के सनसनीखेज मामले में सत्र न्यायालय ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। थाना बजरंगगढ़ क्षेत्र के इस पूरे प्रकरण में न्यायालय ने आरोपी विजय अहिरवार को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।

यह पूरा मामला 13 नवंबर 2025 की रात लगभग 10 से 11 बजे के बीच का है, जब मृतक देवेन्द्र अहिरवार अपनी पत्नी को लेने के लिए घर से निकला था। लेकिन उसी रात उसके साथ ऐसा विवाद हुआ जो जानलेवा बन गया। अभियोजन के अनुसार आरोपी विजय अहिरवार, जो मृतक का साला था, ने बहन के पति देवेन्द्र के साथ किसी बात को लेकर झगड़ा किया और विवाद इतना बढ़ गया कि उसने देवेन्द्र पर हमला कर उसके सिर में गंभीर चोट पहुंचाई।

घटना के बाद अगले दिन 14 नवंबर को देवेन्द्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद 16 नवंबर की सुबह ग्रामीणों की सूचना पर शाला चौपट नदी के पास स्थित कुएं में एक शव मिलने की जानकारी सामने आई। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की पहचान देवेन्द्र अहिरवार के रूप में की। पुलिस ने डायल 100 की सहायता से शव को कुएं से बाहर निकलवाया और पंचनामा कार्रवाई की।

डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ तौर पर यह सामने आया कि मौत सिर में गंभीर चोट लगने से हुई है और कुएं में गिरने की स्थिति में इस प्रकार की चोट संभव नहीं है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या का मामला है।

हालांकि इस केस में कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं था, लेकिन पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित रहा। जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से शराब की दो खाली बोतलें, शराब के पाउच और शर्ट के बटन बरामद हुए, जिन्हें FSL जांच के लिए भेजा गया। इसके अलावा साक्षियों ने भी रात के समय दोनों को झगड़ते हुए देखा था। कलारी दुकान के सीसीटीवी फुटेज में भी मृतक और आरोपी को एक साथ देखा गया, जिससे जांच और मजबूत हुई।

मृतक के पिता राजाराम ने भी न्यायालय में बयान दिया कि घटना से पहले देवेन्द्र अपनी पत्नी को लेने गया था, जो पिछले एक माह से मायके में रह रही थी। अगले दिन संपर्क करने पर देवेन्द्र का फोन नहीं लग पाया और बाद में उसकी लापता होने की जानकारी मिली।

सभी साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने माना कि देवेन्द्र की मौत किसी हादसे से नहीं बल्कि आरोपी द्वारा की गई मारपीट और हत्या के कारण हुई है, और बाद में शव को कुएं में फेंककर सबूत मिटाने का प्रयास किया गया।

सम्पूर्ण सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय गुना ने आरोपी विजय अहिरवार को भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास तथा धारा 238(ख) के तहत अतिरिक्त सजा और अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उपलब्ध साक्ष्य संदेह से परे अपराध को सिद्ध करते हैं और यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है, जिसे छिपाने का प्रयास किया गया था।

 

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