Gwalior Police Training Center Video: खाकी का मतलब अब सिर्फ लाठी नहीं, कड़ी ट्रेनिंग के साथ जवानों को मिल रही म्यूजिक थेरेपी, जानें क्यों लिया गया ये फैसला

Gwalior Police Training Center Video: PTS तिघरा में नव-आरक्षकों को कड़े शारीरिक अभ्यास के साथ म्यूजिक थेरेपी और रंगमंच की ट्रेनिंग दी जा रही

Gwalior Police Training Center Video: खाकी का मतलब अब सिर्फ लाठी नहीं, कड़ी ट्रेनिंग के साथ जवानों को मिल रही म्यूजिक थेरेपी, जानें क्यों लिया गया ये फैसला

Gwalior Police Training Center Video/Image Credit: IBC24.in


Reported By: Nasir Gouri,
Modified Date: June 2, 2026 / 06:40 pm IST
Published Date: June 2, 2026 6:40 pm IST
HIGHLIGHTS
  • PTS तिघरा में पुलिस की ट्रेनिंग का पैटर्न ही बदल दिया गया है।
  • नव-आरक्षकों को कड़े शारीरिक अभ्यास के साथ अब म्यूजिक थेरेपी और रंगमंच की ट्रेनिंग दी जा रही है।
  • राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय के एक्सपर्ट्स इस मिशन में पुलिस का साथ दे रहे हैं।

Gwalior Police Training Center Video: ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में खाकी का मतलब अब सिर्फ लाठी नहीं रहा। PTS तिघरा में पुलिस की ट्रेनिंग का पैटर्न ही बदल दिया गया है। नव-आरक्षकों को कड़े शारीरिक अभ्यास के साथ अब म्यूजिक थेरेपी और रंगमंच की ट्रेनिंग दी जा रही है। उद्देश्य साफ है तनाव मुक्त जवान, और जनता से बेहतर संवाद। राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय के एक्सपर्ट्स इस मिशन में पुलिस का साथ दे रहे हैं।

पुलिस ट्रेनिंग में शामिल किया गया ‘सुर’

पुलिस की ट्रेनिंग मतलब 4 बजे उठना, 10 KM दौड़, परेड, ड्रिल, कानून की धाराएं। कड़ा अनुशासन जरूरी है, पर लगातार प्रेशर से मानसिक तनाव भी बढ़ता है। यही तनाव कई बार जनता से व्यवहार में झलक जाता है। इसी समस्या का तोड़ निकाला है ग्वालियर के PTS तिघरा ने। अब ट्रेनिंग में सिर्फ पसीना नहीं, सुर भी शामिल हैं। (Gwalior Police Training Center Video) पुलिस ट्रेनिंग में परेड + ड्रिल + कानून के साथ. अब म्यूजिक प्लस थिएटर है।

पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में हो रहा म्यूजिक सेशन

ग्वालियर के तिघरा स्थित पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में अब म्यूजिक सेशन हो रहा है। राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के गुरु यहां आकर जवानों को राग, ताल, सुर सिखा रहे हैं। क्लेम ये है कि 45 मिनट का संगीत सेशन दिनभर की थकान उतार देता है। फोकस, एकाग्रता और धैर्य – तीनों बढ़ते हैं। (Gwalior Police Training Center Video) PTS तिघरा SP अखिलेश रैनवाल के मुताबिक, कड़े शारीरिक अभ्यास के बाद संगीत की ये सुरलहरियां जवानों को मानसिक रूप से मजबूत और जनता के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएंगी

जवानों के लिए चलाई जा रही प्रोफेशनल एक्टिंग वर्कशॉप

संगीत के साथ-साथ शुरू हुआ है पुलिस थिएटर क्लब राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के नाट्य एवं रंगमंच संकाय के सहयोग से यहां जवानों के लिए प्रोफेशनल एक्टिंग वर्कशॉप चल रही है। सिखाया जा रहा है बॉडी लैंग्वेज, वॉइस मॉड्यूलेशन, इमोशन कंट्रोल। यानी मुश्किल परिस्थिति में खुद को कैसे ढालना है, (Gwalior Police Training Center Video) भीड़ को कैसे हैंडल करना है, आम आदमी से सम्मान से कैसे बात करनी है। संगीत विश्वविधालय के नाट्य एवं रंगमंच संकाय HOD बताते है रंगमंच आत्मविश्वास बढ़ाने का अच्छा माध्यम है। पुलिस की नौकरी में ये जरूरी है। इससे वो मुश्किल परिस्थितियों में खुद को ढाल सकते हैं, साथ ही तनाव भी दूर होता है।

इंदौर में हुआ था पहला ट्रायल

प्रदेश में इस मॉडल का पहला ट्रायल इंदौर में हुआ था। रिपोर्ट कहती है, थिएटर ट्रेनिंग के बाद पुलिसकर्मियों की जनता से बातचीत में 40% तक सकारात्मक बदलाव आया। शिकायतें कम हुईं, सहयोग बढ़ा। बहरहाल खाकी का मतलब अब बदल रहा है। लाठी के साथ लय भी जरूरी है। डंडे के साथ संवाद भी जरूरी है। (Gwalior Police Training Center Video)  PTS तिघरा का ये म्यूजिक प्लस थिएटर मॉडल अगर 100% सक्सेस रहा,तो MP के हर पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में ये लागू होगा। ग्वालियर से एक नई सोच की शुरुआत तनाव मुक्त पुलिस, संवेदनशील पुलिस।

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