Harsha Richhariya Pravachan: ग्लैमर छोड़ साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया, अब मंच से सुनाई माता सती की कथा, बताया इन शक्ति पीठों का रहस्य

Harsha Richhariya Pravachan: ग्लैमर छोड़ साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया, अब मंच से सुनाई माता सती की कथा, बताया इन शक्ति पीठों का रहस्य

Harsha Richhariya Pravachan: ग्लैमर छोड़ साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया, अब मंच से सुनाई माता सती की कथा, बताया इन शक्ति पीठों का रहस्य

Harsha Richhariya Pravachan//Image Source: IBC24

Modified Date: May 8, 2026 / 07:48 pm IST
Published Date: May 8, 2026 7:48 pm IST
HIGHLIGHTS
  • इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने सन्यास के बाद पहला सार्वजनिक प्रवचन दिया
  • उज्जैन में आयोजित 108 कुंडीय यज्ञ में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए
  • हर्षा नंद गिरी ने माता सती और 52 शक्ति पीठों के महत्व पर किया प्रवचन

उज्जैन। Harsha Richhariya Pravachan: ग्लैमरस गर्ल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में पहचान बना चुकी पूर्व मॉडल हर्षा रिछारिया ने सन्यास लेने के कुछ ही समय बाद अब प्रवचन की दुनिया में भी कदम रख दिया है। उज्जैन से करीब 22 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुरा गांव में आयोजित 108 कुंडीय यज्ञ के दौरान हर्षा ने करीब डेढ़ घंटे तक माता सती और 52 शक्ति पीठों की कथा एवं महत्व का वर्णन किया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके प्रवचन को सुनने पहुंचे।

गौरतलब है कि 19 अप्रैल को उज्जैन स्थित मोनी आश्रम में हर्षा ने विधिवत संन्यास ग्रहण किया था। पंचायती निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज के सानिध्य में उन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागकर साध्वी रूप में ‘स्वामी हर्षानंद गिरी’ नाम अपनाया था। उनके सन्यास को लेकर सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर कई सवाल भी उठे, लेकिन हर्षा लगातार अपने विरोधियों को जवाब देती नजर आईं।

अब सन्यास के बाद उन्होंने प्रवचन की शुरुआत भी कर दी है। शुक्रवार को लक्ष्मीपुरा गांव में उनके पहले प्रवचन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए बड़े-बड़े होर्डिंग्स में “देवी प्रवचन हर्षा नंद गिरी” लिखकर उनकी तस्वीरें लगाई गई थीं। दोपहर करीब एक बजे शुरू हुए प्रवचन में हर्षा ने राजा दक्ष और माता सती की कथा से शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बिना निमंत्रण के कहीं नहीं जाना चाहिए।

52 शक्ति पीठों का बताया रहस्य

प्रवचन के दौरान उन्होंने 52 शक्ति पीठों और हिंदी वर्णमाला के 52 अक्षरों का संबंध बताते हुए कहा कि शक्ति पीठों से ही बीज मंत्र और वर्णमाला की उत्पत्ति मानी जाती है। उन्होंने शक्ति पीठों के दर्शन की मान्यता और सनातन परंपरा का भी उल्लेख किया। हर्षा ने कहा कि एक समय पूरी पृथ्वी सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई थी। पहली बार बड़े मंच से प्रवचन देने पहुंचीं हर्षा बीच-बीच में लिखित नोट्स देखकर बोलती नजर आईं। बाद में उन्होंने कहा कि पहली बार इतने बड़े जनसमूह के सामने प्रवचन देने को लेकर वह घबराई हुई थीं।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने बोलना और हजारों लोगों के बीच मंच से बोलना दोनों अलग बातें हैं, लेकिन गुरु और माता के आशीर्वाद से उनका पहला प्रवचन सफल रहा। प्रवचन के दौरान व्यास गद्दी पर विराजमान हर्षा नंद गिरी के चरण स्पर्श करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। कार्यक्रम में भाजपा बड़नगर मंडल अध्यक्ष और राजपाल सिंह सिसोदिया सहित कई भाजपा नेता भी मौजूद रहे। प्रवचन समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने हर्षा को दक्षिणा भेंट कर आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम में लक्ष्मीपुरा, कायथा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

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