Vande Bharat: गोलियों से दहला बंगाल.. शपथ से पहले बवाल! कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, आखिर कब रुकेगा मौत का तांडव?

गोलियों से दहला बंगाल.. शपथ से पहले बवाल! कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, Bengal Violence After Elections

Vande Bharat: गोलियों से दहला बंगाल.. शपथ से पहले बवाल! कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, आखिर कब रुकेगा मौत का तांडव?

bengal violence news

Modified Date: May 8, 2026 / 12:51 am IST
Published Date: May 8, 2026 12:16 am IST

कोलकाताः bengal violence news: पश्चिम बंगाल एक बार फिर राजनीतिक हिंसा की आग में सुलग उठा है। इस बार निशाना बने हैं नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के करीबी और उनके पीए चंद्रनाथ रथ मध्यमग्राम में हुई इस सनसनीखेज हत्या ने पूरे राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, हावड़ा में भी बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए हैं।

bengal violence news पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में माहौल गमगीन रहा। ये वही इलाका है जहां भारतीय वायु सेना के पूर्व जवान और शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ का पार्थिव शरीर पहुंचा। चंद्रनाथ को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोग नम आंखों से अपने नेता के करीबी को पुष्पांजलि अर्पित की, लेकिन इस दुख के बीच गुस्सा भी है और न्याय की मांग भी। वारदात मध्यमग्राम की है, जहां बीती रात अज्ञात हमलावरों ने चंद्रनाथ को गोलियों से भून दिया। पुलिस ने मामले की तफ्तीश तेज कर दी है। जांच के दौरान पुलिस को वो बाइक मिल गई है, जिसका इस्तेमाल हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए किया था। फिलहाल बाइक मध्यमग्राम थाने में है और फॉरेंसिक टीम सुराग तलाशने में जुटी है। इस हत्या के बाद शुभेंदु अधिकारी का दर्द और आक्रोश दोनों सामने आया। शुभेंदु ने सीधे तौर पर ममता सरकार और टीएमसी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चंद्रनाथ की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वे उनके सहयोगी थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए शुभेंदु ने बताया कि चंद्रनाथ पर 4 गोलियां दागी गईं, जो साबित करता है कि यह एक सोची-समझी साजिश और ‘प्री-मेडिटेटेड मर्डर’ था।

वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मामले में सीधे केंद्रीय गृह मंत्री को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाया कि आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद ऐसी हत्याएं कैसे हो रही हैं। एक तरफ मध्यमग्राम में मातम था, तो दूसरी तरफ हावड़ा के शिवपुर में सियासत का खूनी खेल जारी रहा। चौरबस्ती इलाके में बीजेपी और टीएमसी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। ईंट-पत्थर चले और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस कमिश्नर अखिलेश चतुर्वेदी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाला एक पूर्व वायु सेना कर्मी, अपने ही राज्य की गलियों में राजनीतिक रंजिश की भेंट चढ़ गया। अब सवाल ये है कि क्या बंगाल में चुनाव और सियासत का मतलब सिर्फ और सिर्फ हिंसा ही रह गया है?


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।