भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के सम्मान और संप्रभुता के खिलाफ: कांग्रेस
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के सम्मान और संप्रभुता के खिलाफ: कांग्रेस
भोपाल, 22 फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को भारत के सम्मान और उसकी संप्रभुता के खिलाफ करार देते हुए रविवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के दबाव में आकर इसे अंजाम दिया।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने यहां प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को लेकर इतनी ‘असामान्य और संदिग्ध जल्दबाज़ी’ क्यों की।
उन्होंने कहा, ‘‘यह व्यापार समझौता देशहित, किसानों, युवाओं, ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के खिलाफ है तथा प्रधानमंत्री द्वारा देश पर थोपा गया यह ‘कम्प्रोमाइज्ड’ समझौता है।’’
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी को इस व्यापार समझौते को लेकर इतनी असामान्य और संदिग्ध जल्दबाजी क्यों थी?
श्रीनेत ने कहा कि 20 फरवरी 2026 को अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘रेसिप्रोकल टैरिफ या पारस्परिक शुल्क’ नीति पर रोक लगा दी और इसके बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं तथा भारत के लिए बेहतर सौदेबाजी की संभावनाएं खुल सकती थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतज़ार किए बिना महज़ 30 मिनट की फोन कॉल के आधार पर एक ऐसे व्यापार समझौते पर सहमति दे दी, जो सीधे-सीधे भारत के हितों के विरुद्ध है।’’
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि अमेरिका के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भारत पर अधिकतम 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क लागू होता लेकिन फरवरी की शुरुआत में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत शुल्क स्वीकार कर लिया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘यानी तीन प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक शुल्क पहुंचने पर भी सरकार इसे उपलब्धि बताकर जश्न मना रही थी। यह जश्न नहीं, बल्कि देश को गुमराह करने की कोशिश है।’’
श्रीनेत ने दावा किया कि इस समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर लगभग शून्य शुल्क लागू करने का वादा किया, पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के सामान का आयात स्वीकार किया और रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद करने जैसी शर्तों पर सहमति जताई।
उन्होंने सवाल किया कि जब देश के किसान पहले से ही संकट में हैं तो अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाज़ार खोलकर किसानों को तबाही की ओर क्यों धकेला जा रहा है?
श्रीनेत ने दावा किया कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और डेटा सुरक्षा पर भी सीधा हमला है।
उन्होंने कहा, ‘‘रूस से सस्ता कच्चा तेल न खरीदने का वादा कर भारत को महंगे आयात पर निर्भर बनाने की साजिश रची गई है, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा। साथ ही, देश का संवेदनशील डेटा अमेरिका को सौंपने जैसी शर्तें भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा हैं।’’
भाषा ब्रजेन्द्र धीरज
धीरज

Facebook


