अनजाने में ‘‘एनआरआई’’ कोटा चुनने पर नीट काउंसलिंग से वंचित आदिवासी छात्रा को राहत

अनजाने में ‘‘एनआरआई’’ कोटा चुनने पर नीट काउंसलिंग से वंचित आदिवासी छात्रा को राहत

Modified Date: February 17, 2022 / 08:32 pm IST
Published Date: February 17, 2022 8:32 pm IST

इंदौर, 17 फरवरी (भाषा) ऑनलाइन पंजीयन फॉर्म भरते वक्त अनजाने में ‘‘एनआरआई’’ (प्रवासी भारतीय) कोटा चुनने पर राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) की काउंसलिंग में शामिल होने से वंचित कर दी गई आदिवासी छात्रा को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से राहत मिली है।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विवेक रुसिया और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार वर्मा ने बड़वानी जिले की निवासी पूर्वा बालके (19) की रिट याचिका मंजूर करते हुए निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को नीट काउंसलिंग के अंतिम चरण में फिर से पंजीयन कराने का मौका दिया जाए।

युगल पीठ ने 15 फरवरी (मंगलवार) को पारित फैसले में कहा कि देश के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र की छात्रा ने नीट की प्रावीण्य सूची में अच्छा स्थान हासिल किया। लेकिन, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसने काउंसलिंग के ऑनलाइन पंजीयन फॉर्म में अनजाने में गलत वर्ग चुन लिया और वह पंजीयन की आखिरी तारीख से पहले अपनी इस भूल को सुधार नहीं सकी।

उच्च न्यायालय ने मामले के तथ्यों और हालात पर गौर करने के बाद कहा,‘‘हम इसे विशेष मामले के तौर पर देखते हुए निर्देश दे रहे हैं कि याचिकाकर्ता (आदिवासी छात्रा) को नीट काउंसलिंग के अंतिम चरण के लिए पुन: पंजीयन की अनुमति दी जाए और इस मामले को नजीर नहीं माना जाए।’’

याचिका के मुताबिक बड़वानी जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली बालके जनजातीय वर्ग की उम्मीदवार के रूप में वर्ष 2021 की नीट में शामिल हुई थीं और उन्होंने इस चयन परीक्षा की प्रावीण्य सूची में जनजातीय वर्ग में 4,540 वां स्थान तथा अखिल भारतीय स्तर पर 2,24,236वां पायदान हासिल किया था।

इसमें कहा गया कि नीट काउंसलिंग का ऑनलाइन पंजीयन फॉर्म भरते समय बालके ने जनजातीय वर्ग के बजाय ‘‘एनआरआई’’ कोटा चुन लिया था जिससे उसे काउंसलिंग में भाग लेने से वंचित कर दिया गया था। इसके बाद उसने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

भाषा हर्ष रंजन

रंजन


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