Vande Bharat: चली-चली की बेला.. उद्धव के साथ ‘खेला’! 6 सांसदों की बगावत पर भड़के संजय राउत, क्या ठाकरे गुट को लगेगा दूसरा बड़ा झटका?
Shiv Sena UBT Crisis News: चार साल पहले 39 विधायकों की बगावत के बाद बिखरी शिवसेना,एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी है।
Shiv Sena UBT Crisis News/Image Credit: File Image
- उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद भी शिवसेना UBT का साथ छोड़ सकते हैं।
- 9 में से 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए पत्र भेजा है।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने बागी सांसदों पर तीखी टिप्पणी की।
Shiv Sena UBT Crisis News: नई दिल्ली: चार साल पहले 39 विधायकों की बगावत के बाद बिखरी शिवसेना,एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी है। जहां से वो फिर टूट सकती है। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद भी शिवसेना UBT का साथ छोड़ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक 9 में से 6 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए पत्र भेजा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जिन 6 सांसदों ने अब बगावत का झंडा बुलंद किया है.. उनमें
भाऊसाहेब वाकचौरे – शिर्डी..
नागेश पाटिल आष्टीकर – हिंगोली..
संजय दीना पाटिल – मुंबई उत्तर-पूर्व..
संजय हरिभाऊ जाधव – परभणी..
ओमप्रकाश राजेनिंबालकर – उस्मानाबाद..
संजय देशमुख – यवतमाल..शामिल हैं..
वहीं अरविंद सावंत – मुंबई दक्षिण,,
अनिल देसाई – मुंबई दक्षिण मध्य,,
राजाभाऊ वाजे – नासिक,, फिलहाल उद्धव के साथ बताए जा रहे हैं।
पार्टी में बगावत की खबरों के बीच दिल्ली में संजय राउत का गुस्सा कैमरे पर नजर आया। (Shiv Sena UBT Crisis News) प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने बागी सांसदों पर तीखी टिप्पणी की।
राउत के बयान पर विवाद बढ़ा, बीजेपी और शिंदे गुट ने इसे शिवसेना UBT की हताशा बताया..तो विपक्षी दलों ने भी राउत की भाषा पर सवाल उठाए।
जब बयान पर विवाद बढ़ा तो संजय राउत ने सफाई भी दी। राउत भले ही इसे मराठी की आम बोलचाल बता रहे हों, लेकिन सवाल सिर्फ भाषा का नहीं। सवाल उस राजनीतिक संकट का है..जो उद्धव ठाकरे की पार्टी के सामने खड़ा दिखाई दे रहा है।
चार साल पहले शिंदे की अगुवाई में 39 विधायक अलग हुए। अब अगर सांसदों की ये बगावत सच साबित होती है, (Shiv Sena UBT Crisis News) तो लोकसभा में उद्धव गुट की ताकत और सिमट जाएगी।
महाराष्ट्र में शिवसेना UBT के भीतर उठी बगावत की अटकलों ने विपक्षी खेमे की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर लोकसभा स्पीकर और बागी बताए जा रहे सांसदों के अगले कदम पर है, क्योंकि अगर ये टूट आधिकारिक रूप लेती है..तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा शक्ति संतुलन बदल सकता है।
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