जबलपुर पश्चिम के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए

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जबलपुर पश्चिम के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए

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  • Publish Date - May 28, 2018 / 01:59 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:23 PM IST

जबलपुर। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश की जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र कीये सीट कभी बीजेपी का गढ़ हुआ करती थी। पिछले चुनाव में कांग्रेस इस किले में सेंध लगाने में सफल हुईजबलपुर जिले की इस अनारक्षित सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी-कांग्रेस के बीच ही रहा है और आने वाले चुनाव में भी इन्हीं दोनों में घमासान होना तय है चुनावी साल है तो सीट पर तमाम सियासी दल, मौजूदा विधायक और विपक्ष के उम्मीदवार जातिगत समीकरणों के बूते जीत का गणित समझने में जुट गए हैं।

कलकल बहती मां नर्मदा और गोंडवाना काल में बना मदन महल किला जबलपुर के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र को देश भर में अलग पहचान दिलाता हैकुदरती तौर पर धनी होने के अलावा ये इलाका सामाजिक विविधता से भी भरा हुआ है।

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जितना वैभवशाली इस क्षेत्र का इतिहास रहा है, उतनी ही दिलचस्प यहां की सियासत है। 5 साल पहले तक बीजेपी की गढ़ रही इस सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा हैवैसे जबलपुर पश्चिम सीट के सियासी इतिहास पर नजर डाले तों 1998, 2003 और 2008 में बीजेपी के हरेंद्रजीत सिह बब्बू लगातार यहां से विधायक चुने गएलेकिन 2013 के चुनाव में कांग्रेस के तरुण भानोत ने हरेंद्रजीत सिंह बब्बू को शिकस्त दीइस चुनाव में जहां कांग्रेस को 62 हज़ार 668 वोट मिले, वहीं बीजेपी 61 हजार 745 वोट ही ले पाईइस तरह जीत का अंतर 923 वोटों का रहा।  अब जबकि फिर 2018 का सियासी संग्राम सामने है तो सियासी दल यहां जीत का गणित समझने की उधेड़बुन में लग गए हैं

दरअसल जबलपुर पश्चिम विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण ही ऐसा है कि इस अनारक्षित सीट पर प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दलों ने कभी आरक्षित वर्ग के चेहरे को यहां से टिकट नहीं दी। हालांकि स्वर्ण-ओबीसी वर्ग में बीजेपी के तात्कालिक जनाधार और सिख पंजाबी वोटर्स का साथ अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाले हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू को इसका फायदा चुनावों में मिलता रहा, लेकिन 2013 में जिस तरह से इसी गणित के समीकरण बदले तो अब बीजेपी के सियासी पंडित भी सोचने को मजबूर हो गए हैं। 

राजनीति के क्षेत्र में काम करने वाला हर कार्यकर्ता चुनाव में टिकट मांगने का हक रखता हैलेकिन जब ये डिमांड गुटबाजी और आपसी छीटाकंशी में तब्दील हो जाती है तो पार्टी को हार का सामना करना पड़ता हैबीते विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू का पार्टी के भीतर ही विरोध और फिर भितरघात चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण थाइस बार भी बीजेपी नेताओं के बीच टिकट का टशन कुछ ऐसा ही हैदूसरी ओर कॉन्ग्रेस में भी टिकट दावेदारों की कमी नहीं है

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वोटर्स के लिहाज से जबलपुर की सबसे बड़ी सीट है जबलपुर पश्चिम विधानसभाजितनी बड़ी सीट हैउतनी ही दिलचस्प यहां की सियासत हैकभी बीजेपी का गढ़ रह चुकी इस सीट पर पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज की थीशायद यही वजह है कि बीजेपी नेता इसे सेफ सीट मानकर चल रहे हैं और टिकट दावेदारों की लंबी फौज खड़ी है। बीजेपी से संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो टिकट की रेस में तीन बार के विधायक और पूर्व मंत्री हरेंद्र जीत सिंह बब्बू का नाम सबसे आगे है..इनके अलावा पूर्व मंत्री अजय विश्नोई भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैंवहीं केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा के रिश्तेदार दीपांकर बैनर्जी, पूर्व महापौर प्रभात साहू, पार्टी के प्रदेश महामंत्री विनोद गोंटिया, नर्मदा यात्रा के संयोजक रहे डॉक्टर जितेन्द्र जामदार, पूर्व महापौर सदानंद गोडबोले, महापौर स्वाति गोडबोले, जेडीए अध्यक्ष डॉक्टर विनोद मिश्रा, भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पाण्डेय और पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शशिकांत शुक्ला भी टिकट के दावेदार हैं ये तमाम दावेदार खुलकर यहां टिकट की मांग कर रहे हैं

बीजेपी में टिकट को लेकर गुटबाजी भी हावी है हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू को पूर्व मंत्री अजय विश्नोई की दावेदारी इतनी खटक रही है कि उन्हें भगोड़ा बताकर खुद को ही टिकट का हकदार बता रहे हैं और टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैंदूसरी ओर अजय विश्नोई का कहना है कि पार्टी पिछला चुनाव बब्बू की कमज़ोर दावेदारी से ही हार गई थी और आज किसी में इतनी क्षमता नहीं है कि वो पार्टी के घोषित उम्मीदवार को भितरघात से चुनाव में हरा दे। हालांकि बब्बू इस पलटवार पर भी हमला करने से बाज़ नहीं आ रहे

ऐसा नहीं है कि टिकट को लेकर केवल बीजेपी में ही घमासान मचा है कांग्रेस में भी कमोबेश वही हालात हैसिटिंग एमएलए होने के चलते तरुण भानोत को यहां टिकट मिलना तय माना जा रहा है लेकिन पार्टी के जगत बहादुर सिंह अन्नू, नरेंद्र सिंह पांधे, केवल कृष्ण आहूजा और राममूर्ति मिश्रा भी टिकट की मांग कर रहे हैं हालांकि विधायक इस मामले पर पार्टी लाईन पर ही चलने की बात कह रहे हैं

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जबलपुर पश्चिम विधानसभा सीट पर हुए बीते तमाम चुनावों के परिणाम बताते हैं कि यहां की जनता निर्दलीय या किसी अन्य दल के नेता को अपना विधायक चुनने का इरादा नहीं रखती पिछले चुनाव में भी यहां से 9 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिसमें से 7 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी और मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही हुआ था शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले दोनों ही प्रमुख पार्टियों में यहां दावेदारों के बीच टिकट की टशन तेज हो गई है।

मतदाताओं की संख्या के लिहाज से जबलपुर के सबसे बड़े इस विधानसभा क्षेत्र में हमने सियासी समीकरण को समझने के बाद मुद्दों को भी टटोलने की कोशिश की..हमने पाया कि कॉन्ग्रेस के मौजूदा विधायक तरुण भानोत जिन वादों पर चुनाव जीते थेउन्हें निभाने में अब तक नाकाम रहे हैं विधायक होकर तरुण भानोत प्रदेश कॉन्ग्रेस का बहुचर्चित चेहरा तो बन गए लेकिन इसके फेर में उनका अधिकांश समय प्रदेश सरकार की घेराबंदी में ही गुज़र गया चुनावी साल है तो जबलपुर के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में  सियासी सरगर्मियां बढ़ गयी है मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैकांग्रेस-बीजेपी के नेता एकदूसरे की कमियां गिना रहे हैंविपक्ष की भूमिका निभा रही बीजेपी जहां वर्तमान विधायक की नाकामियों को जनता के बीच गिना रही हैवहीं विधायक पर निष्क्रिय होने का आरोप भी लगाती हैहालांकि विधायक तरुण भानोत विपक्ष के आरोपों से इत्तेफाक नहीं रखतेउनके मुताबिक उन्होंने जनता से जुड़े हर सवाल को उठाया है और जरुरत पड़ने पर जनता के बीच खड़ा होकर अपना धर्म ईमानदारी से निभाया है।

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आरोप-प्रत्यारोप से इतर जबलपुर विधानसभा क्षेत्र में मुद्दों की बात करें तो जिन तालाबों को बचाने और जलसंकट को दूर करने के मुद्दे पर तरुण भानोत ने वोटरों का दिल जीता थाउनकी बदहाली साफ तौर देखी जा सकती है जिस महानद्दा तालाब को बचाने के मुद्दे पर तरुण को जनता का साथ मिलाउसकी मौजूदा हालात पर विरोधी और जनता दोनों मुखर हैं जलसंकट का मुद्दा भी इस चुनाव में विधायक जी के खिलाफ जा सकता है लेकिन विधायक अपने नाम वाले पानी के टैंकर्स से जलापूर्ति कर नगर निगम और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस का विधायक होने के कारण उनके क्षेत्र के साथ भेदभाव होता है।

जलसंकट ही नहीं, जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में झुग्गियों और विस्थापित बस्तियों में रह रहे लोग खराब सड़क, पानी,जलप्लावन की समस्याएं झेलने को मजबूर हैंपरसवाड़ा और बालसागर की विस्थापित बस्तियां आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही हैंहालांकि विधायकजी इन बस्तियों में पन्नी, बस्ते और साड़ियां जरूर बांटते नजर आते हैं, जिसे लेकर बीजेपी के नेता उन पर आरोप लगा रहे हैं कि वो समस्या दूर करने के बजाए प्रलोभन की राजनीति कर रहे हैं। लेकिन तरुण भानोत इन आरोपों पर कहते हैं कि उनकी कोशिश किसी भी तरह गरीबों के चेहरे पर खुशी लाने की है और वो स्वस्थ राजनीति कर रहे हैं।

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विधायक महोदय भले अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करेंलेकिन सच्चाई ये भी है कि तरुण भानोत ने अपना अधिकांश वक्त जनता के बीच रहने की बजाए प्रदेश की राजनीति में सरकार को घेरने में ही गुज़ार दिया। ऐसे में जाहिर है, आने वाले चुनाव में यहां एक बार वही पुराने मुद्दे गूंजने तय हैं। 

वेब डेस्क, IBC24